फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Sirmour News ›   court news sirmour

Sirmour News: मानकहीन दवा मामले में फार्मा कंपनी के पार्टनर समेत पांच आरोपी बरी

Thu, 03 Sep 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
court news sirmour
नमूना लेने की प्रक्रिया पर कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल, स्वतंत्र गवाह न होने और सील की सुरक्षा पर भी जताया संदेह
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मानकहीन दवा के कथित मामले में कालाअंब के जोहड़ों स्थित मैसर्स विद्याशा फार्मास्यूटिकल्स के पार्टनर समेत पांच आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। नाहन स्थित विशेष न्यायाधीश-द्वितीय गौरव महाजन की अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को उचित संदेह से परे साबित नहीं कर पाने पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने मामले में दवा के नमूने लेने और उन्हें प्रयोगशाला तक सुरक्षित पहुंचाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
मामला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 18(ए)(i) व 16(1)(ए) के तहत दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार मैसर्स विद्याशा फार्मास्यूटिकल्स की ओर से निर्मित आइसोट्रेटिनोइन कैप्सूल आईपी (विसोटिन-10) का एक नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा था। यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से ड्रग्स इंस्पेक्टर दिनेश कुमार ने 21 जनवरी 2022 को कंपनी परिसर से दवा का नमूना लिया था। बाद में चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय दवा परीक्षण प्रयोगशाला की 23 मार्च 2022 की रिपोर्ट में नमूने को मानक गुणवत्ता का नहीं बताया गया।
विज्ञापन

मामले में कंपनी के पार्टनर नितिन गुप्ता और अर्पित अग्रवाल, मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट ध्रुव देव, एनालिटिकल केमिस्ट नवनीत सिंह तथा बाजार में दवा जारी करने के लिए जिम्मेदार सचिन माने को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की जिरह में ड्रग्स इंस्पेक्टर की कार्रवाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अदालत ने गौर किया कि शिकायत के साथ निरीक्षक के प्राधिकरण अथवा पदस्थापना से संबंधित कोई पत्र संलग्न नहीं था। निरीक्षण से संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे अहम बात यह रही कि नमूना लेते समय कोई स्थानीय स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। नमूना लेने और उसे सील करने की प्रक्रिया की न तो फोटोग्राफी कराई गई और न ही वीडियोग्राफी की गई। इससे नमूने की प्रक्रिया और उसकी सुरक्षा को लेकर अभियोजन के दावे पर सवाल खड़े हुए।
अदालत ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि ड्रग्स इंस्पेक्टर ने नमूने अपने घर ले जाकर रखे और सोमवार को उन्हें प्रयोगशाला भेजा। इस दौरान नमूना किस परिस्थितियों में रखा गया, उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई और सील की निरंतर निगरानी किस प्रकार हुई, इसे लेकर अभियोजन पर्याप्त भरोसा पैदा नहीं कर सका।
अदालत ने विशेष रूप से इस पहलू पर गौर किया कि सील लगातार ड्रग्स इंस्पेक्टर की ही हिरासत में रही। ऐसे में नमूने में बदलाव अथवा छेड़छाड़ की संभावना को पूरी तरह नकारने के लिए आवश्यक साक्ष्य अदालत के समक्ष नहीं रखे जा सके।

मामले में दवा के नमूने के भंडारण के दौरान तापमान, आर्द्रता और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों को लेकर भी अभियोजन की ओर से पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी आया कि संबंधित दवा तापमान और आर्द्रता के प्रति संवेदनशील हो सकती है। ऐसे में नमूने को प्रयोगशाला भेजे जाने तक निर्धारित परिस्थितियों में सुरक्षित रखने के संबंध में ठोस रिकॉर्ड का अभाव अभियोजन के मामले के लिए महत्वपूर्ण रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed