{"_id":"5a79bc154f1c1b8e238b7044","slug":"61517927445-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेणुका बांध निर्माण का मामला अधर में लटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेणुका बांध निर्माण का मामला अधर में लटका
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रेणुका बांध निर्माण का मामला अधर में लटका
केंद्रीय बजट में नहीं मिली प्रोजेक्ट को धनराशि
औपचारिकताएं पूरी, अब सिर्फ बजट का इंतजार
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)।
महत्वाकांक्षी रेणुका बांध प्रोजेक्ट का मामला फिलहाल लटक गया है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 43 लाख करोड़ का बजट पास कर भले ही देश की जनता को लुभाने का प्रयास किया हो लेकिन रेणुका बांध परियोजना के निर्माण को लेकर बजट में कोई प्रावधान न होने से फिलहाल इसके निर्माण का अधर में लटका नजर आ रहा है।
राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना के निर्माण को लेकर केंद्र सरकार की बेरुखी प्रदेश सरकार के साथ-साथ राजधानी दिल्ली वासियों पर भी भारी पड़ रही है। करीब 53 सौ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस परियोजना के निर्माण को लेकर अभी तक बजट का कोई प्रावधान नहीं हो पाया है। बांध निर्माण से जुड़ी तमाम औपचारिकताओं को पूर्ण कर लिया गया है, केवल बजट का ही इंतजार है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अक्टूबर 2016 में मिले केंद्र सरकार से करीब 447 करोड़ रुपये में से 241 करोड़ की राशि भूमि अधिग्रहण पर खर्च हो चुकी है। बांध से विस्थापित व प्रभावित होने वाले परिवारों को दस चरणों में यह धन बांटा गया। शेष बची राशि का कुछ भाग अभी भी भूमि अधिग्रहण पर ही खर्च किया जाना है जिसे चुनाव आचार संहिता के दौरान रोक दिया गया था। इस राशि के खर्च हो जाने के बाद रेणुका में बांध प्रबंधन के हाथ फिर से खाली रह जाएंगे।
विज्ञापन
बजट के अभाव में अधिकारी और कर्मचारियों के वेतन तक के लाले पड़ सकते हैं। परियोजना के निर्माण को लेकर बीते 25 वर्षों से अनेक बार डीपीआर बनाई गई।
बॉक्स के लिए--
1992 से बन रही डीपीआर
रेणुका बांध परियोजना के लिए वर्ष 1992 से डीपीआर बनाने का दौर जारी है। हर 3 साल बाद डीपीआर को पुन: बनाकर केंद्र को भेजा जा रहा है। शुरूआती दौर में इसके निर्माण पर मात्र 1382.54 करोड़ रुपये की राशि खर्च होनी थी, जो वर्तमान में चार गुना अधिक बढ़कर 54 सौ करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।
नितिन गडकरी से उठाएंगे मामला : कश्यप
लोकसभा सांसद विरेंद्र कश्यप ने कहा कि रेणुका बांध का मुद्दा उनके जहन में है। वह बांध निर्माण को लेकर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। पहले भी उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों से बात की थी। उस दौरान बांध की औपचारिकता पूरी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही बांध के अधिकारियों के साथ बैठकर इस संबंध में जानकारी हासिल कर इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।
------------भारद्वाज
केंद्रीय बजट में नहीं मिली प्रोजेक्ट को धनराशि
औपचारिकताएं पूरी, अब सिर्फ बजट का इंतजार
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)।
महत्वाकांक्षी रेणुका बांध प्रोजेक्ट का मामला फिलहाल लटक गया है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 43 लाख करोड़ का बजट पास कर भले ही देश की जनता को लुभाने का प्रयास किया हो लेकिन रेणुका बांध परियोजना के निर्माण को लेकर बजट में कोई प्रावधान न होने से फिलहाल इसके निर्माण का अधर में लटका नजर आ रहा है।
राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना के निर्माण को लेकर केंद्र सरकार की बेरुखी प्रदेश सरकार के साथ-साथ राजधानी दिल्ली वासियों पर भी भारी पड़ रही है। करीब 53 सौ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस परियोजना के निर्माण को लेकर अभी तक बजट का कोई प्रावधान नहीं हो पाया है। बांध निर्माण से जुड़ी तमाम औपचारिकताओं को पूर्ण कर लिया गया है, केवल बजट का ही इंतजार है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अक्टूबर 2016 में मिले केंद्र सरकार से करीब 447 करोड़ रुपये में से 241 करोड़ की राशि भूमि अधिग्रहण पर खर्च हो चुकी है। बांध से विस्थापित व प्रभावित होने वाले परिवारों को दस चरणों में यह धन बांटा गया। शेष बची राशि का कुछ भाग अभी भी भूमि अधिग्रहण पर ही खर्च किया जाना है जिसे चुनाव आचार संहिता के दौरान रोक दिया गया था। इस राशि के खर्च हो जाने के बाद रेणुका में बांध प्रबंधन के हाथ फिर से खाली रह जाएंगे।
विज्ञापन
बजट के अभाव में अधिकारी और कर्मचारियों के वेतन तक के लाले पड़ सकते हैं। परियोजना के निर्माण को लेकर बीते 25 वर्षों से अनेक बार डीपीआर बनाई गई।
बॉक्स के लिए--
1992 से बन रही डीपीआर
रेणुका बांध परियोजना के लिए वर्ष 1992 से डीपीआर बनाने का दौर जारी है। हर 3 साल बाद डीपीआर को पुन: बनाकर केंद्र को भेजा जा रहा है। शुरूआती दौर में इसके निर्माण पर मात्र 1382.54 करोड़ रुपये की राशि खर्च होनी थी, जो वर्तमान में चार गुना अधिक बढ़कर 54 सौ करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।
नितिन गडकरी से उठाएंगे मामला : कश्यप
लोकसभा सांसद विरेंद्र कश्यप ने कहा कि रेणुका बांध का मुद्दा उनके जहन में है। वह बांध निर्माण को लेकर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। पहले भी उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों से बात की थी। उस दौरान बांध की औपचारिकता पूरी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही बांध के अधिकारियों के साथ बैठकर इस संबंध में जानकारी हासिल कर इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।
------------भारद्वाज