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आड़ू के दाम लुढ़कने से बागवान मायूस
Updated Sat, 23 Jun 2018 11:34 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
राजगढ़ (सिरमौर)। पीच वैली के नाम से मशहूर राजगढ़ इलाके के आड़ू उत्पादक इस साल बैकफुट पर आ गए हैं। एक तो इस साल फसल अच्छी नहीं है। उस पर अब आड़ू के दाम भी लुढ़क गए हैं। आड़ू की कीमत में पिछले साल के मुकाबले इस साल आड़ू की कीमत में 300 रुपये प्रति पेटी कमी दर्ज की जा रही है।
गत वर्ष राजगढ़ के आड़ू की एक पेटी के दाम दिल्ली मंडी में सात सौ रुपये तक थे लेकिन इस साल आड़ू की कीमत 400 रुपये प्रति पेटी ही चल रही है। आड़ू उत्पादक अनिल शर्मा, सुरेंद्र तोमर, यशपाल, रविदत्त व विरेंद्र ने बताया कि आड़ू का उत्पादन प्रतिकूल मौसम के चलते वर्ष दर वर्ष कम होता जा रहा है। 90 के दशक में राजगढ़ में प्रतिदिन करीब चालीस पचास ट्रक विभिन्न मंडियों में जाते थे लेकिन अब मात्र पांच-छह ट्रक ही मंडी को जा रहे है।
इस साल भी आड़ू की फसल बेहद कम है। फ्लावरिंग के समय ठंडक होने से सेटिंग नहीं हो पाई। रही सही कसर ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। अब सब्जी मंडियों में भी आड़ के वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि आड़ू की पेटी पर खर्च करीब सौ रुपये हो रहा है लेकिन इस अनुपात में दाम नहीं मिल रहे। विभाग के विषय विशेषज्ञ डॉ. उजागर सिंह तोमर ने बताया कि इस बार आड़ू में सेटिंग काफी कम हुई है। ओलावृष्टि से भी काफी नुकसान हुआ है। राजगढ़ क्षेत्र में करीब 12 सौ हेक्टेयर भूमि पर आड़ू के बागीचे लगे हैं लेकिन उसके अनुसार फसल का उत्पादन नहीं हो रहा है।
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राजगढ़ (सिरमौर)। पीच वैली के नाम से मशहूर राजगढ़ इलाके के आड़ू उत्पादक इस साल बैकफुट पर आ गए हैं। एक तो इस साल फसल अच्छी नहीं है। उस पर अब आड़ू के दाम भी लुढ़क गए हैं। आड़ू की कीमत में पिछले साल के मुकाबले इस साल आड़ू की कीमत में 300 रुपये प्रति पेटी कमी दर्ज की जा रही है।
गत वर्ष राजगढ़ के आड़ू की एक पेटी के दाम दिल्ली मंडी में सात सौ रुपये तक थे लेकिन इस साल आड़ू की कीमत 400 रुपये प्रति पेटी ही चल रही है। आड़ू उत्पादक अनिल शर्मा, सुरेंद्र तोमर, यशपाल, रविदत्त व विरेंद्र ने बताया कि आड़ू का उत्पादन प्रतिकूल मौसम के चलते वर्ष दर वर्ष कम होता जा रहा है। 90 के दशक में राजगढ़ में प्रतिदिन करीब चालीस पचास ट्रक विभिन्न मंडियों में जाते थे लेकिन अब मात्र पांच-छह ट्रक ही मंडी को जा रहे है।
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इस साल भी आड़ू की फसल बेहद कम है। फ्लावरिंग के समय ठंडक होने से सेटिंग नहीं हो पाई। रही सही कसर ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। अब सब्जी मंडियों में भी आड़ के वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि आड़ू की पेटी पर खर्च करीब सौ रुपये हो रहा है लेकिन इस अनुपात में दाम नहीं मिल रहे। विभाग के विषय विशेषज्ञ डॉ. उजागर सिंह तोमर ने बताया कि इस बार आड़ू में सेटिंग काफी कम हुई है। ओलावृष्टि से भी काफी नुकसान हुआ है। राजगढ़ क्षेत्र में करीब 12 सौ हेक्टेयर भूमि पर आड़ू के बागीचे लगे हैं लेकिन उसके अनुसार फसल का उत्पादन नहीं हो रहा है।