{"_id":"5ca245d3bdec221450545ff1","slug":"131554138579-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कनाडा में राजगढ़ के सौरभ ठाकुर का डंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कनाडा में राजगढ़ के सौरभ ठाकुर का डंका
विज्ञापन
पांवटा साहिब (सिरमौर)। जिला सिरमौर के पीएचडी छात्र सौरभ ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संघ के सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व किया है। यह कार्यक्रम कनाडा के टोरेंटो शहर में 28 से 31 मार्च तक चला। इसमें विश्व के 150 देशों से आए 17 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें भारत से सौरभ समेत 20 शोधार्थियों ने भाग लिया।
हिमाचल के सिरमौर जिले के राजगढ़ के शामरा गांव निवासी एवं जेएनयू दिल्ली में पीएचडी कर रहे सौरभ ठाकुर ने इसमें भाग लेकर पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बता दें कि शमारा निवासी सौरभ ठाकुर पुत्र डॉ. अमीचंद कमल दिल्ली के जेएनयू में पीएचडी कर रहे हैं। पीएचडी के इस छात्र ने कनाडा के टोरेंटो में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संघ की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह अंतरराष्ट्रीय संबंध का सबसे बड़ा सम्मेलन का हिस्सा है, जिसमें दुनिया के करीब सभी देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया है। कार्यक्रम में सौरभ ठाकुर के पेपर का शीर्षक 28 मार्च को प्रस्तुत किया गया जो जलवायु परिवर्तन है.. व न्याय के दावे की आवश्यकता.., पर आधारित रहा। सम्मेलन में उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल एक वैज्ञानिक प्रश्न ही नहीं है, बल्कि राजनीतिक प्रश्न भी है।
विज्ञापन
हिमाचल के सिरमौर जिले के राजगढ़ के शामरा गांव निवासी एवं जेएनयू दिल्ली में पीएचडी कर रहे सौरभ ठाकुर ने इसमें भाग लेकर पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बता दें कि शमारा निवासी सौरभ ठाकुर पुत्र डॉ. अमीचंद कमल दिल्ली के जेएनयू में पीएचडी कर रहे हैं। पीएचडी के इस छात्र ने कनाडा के टोरेंटो में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संघ की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह अंतरराष्ट्रीय संबंध का सबसे बड़ा सम्मेलन का हिस्सा है, जिसमें दुनिया के करीब सभी देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया है। कार्यक्रम में सौरभ ठाकुर के पेपर का शीर्षक 28 मार्च को प्रस्तुत किया गया जो जलवायु परिवर्तन है.. व न्याय के दावे की आवश्यकता.., पर आधारित रहा। सम्मेलन में उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल एक वैज्ञानिक प्रश्न ही नहीं है, बल्कि राजनीतिक प्रश्न भी है।
विज्ञापन