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Rampur Bushahar News: देवरी घाट जोधपुर में होगा महाभारत काल का ठोडा खेल
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ठियोग के देवरी घाट जोधपुर में ठोढा खेल मेले के शुभारंभ पर नाटी डालते लोग। संवाद
तीन दिवसीय ठोडा खेल मेला शुरू, आज दो दलों के खिलाड़ी धनुष से एक-दूसरे पर चलाएंगे बाण
अंतिम दिन रस्साकशी प्रतियोगिता करवाई जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
ठियोग के खगाल्द परगने के देवरी घाट जोधपुर में शुक्रवार से तीन दिवसीय पारंपरिक ठाेडा खेल मेला शुरू हो गया। देवरी घाट जोधपुर में होने वाले ठोडा खेले में महाभारतकाल से जुड़ा है। मेले का शुभारंभ देवता चिखड़ेश्वर महाराज के ताला आगमन और राजा सैंज के प्रतिनिधि की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके बाद मैदान को परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार खोला गया। नगैईक बलसन क्षेत्र के शाठी दल और फागू के फगाणै पाशी दल शुक्रवार को देवरी घाट पहुंच गए, जहां उन्होंने पहाड़ी धुनों पर नाटी डाली। शनिवार सुबह ये दोनों दल ढोल और करनाल की गूंज के साथ डांगुरू लहराते और पारंपरिक नृत्य करते हुए मैदान में प्रवेश करेंगे। मेले की शुरुआत दोनों दलों के वरिष्ठ ठोडा खिलाड़ियों की ओर से एक-दूसरे पर धनुष से बाण चलाकर की जाएगी, जो इस खेल की ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाता है। ठोडा खेल को महाभारतकाल से जुड़ा माना जाता है। इस खेल में शाठी दल कौरव और पाशी दल पांडवों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इसे केवल खेल ही नहीं बल्कि एक जीवंत ऐतिहासिक परंपरा भी बनाता है। मेले के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में केशव चौहान शिरकत करेंगे, जबकि अंतिम दिन समाजसेवी राजेश गुप्ता कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। अंतिम दिन रस्साकशी प्रतियोगिता करवाई जाएगी। इसमें महिला वर्ग की आठ टीमें भाग लेंगी। इसके अलावा स्थानीय महिला मंडल सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे, जो मेले का मुख्य आकर्षण होंगे। ठोडा बिशू कमेटी देवरी घाट जोधपुर के प्रधान भूपेंद्र वेक्टा ने बताया कि यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। तीन दिन तक चलने वाला यह मेला न केवल खेल प्रतियोगिता बल्कि परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम बनेगा।
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अंतिम दिन रस्साकशी प्रतियोगिता करवाई जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
ठियोग के खगाल्द परगने के देवरी घाट जोधपुर में शुक्रवार से तीन दिवसीय पारंपरिक ठाेडा खेल मेला शुरू हो गया। देवरी घाट जोधपुर में होने वाले ठोडा खेले में महाभारतकाल से जुड़ा है। मेले का शुभारंभ देवता चिखड़ेश्वर महाराज के ताला आगमन और राजा सैंज के प्रतिनिधि की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके बाद मैदान को परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार खोला गया। नगैईक बलसन क्षेत्र के शाठी दल और फागू के फगाणै पाशी दल शुक्रवार को देवरी घाट पहुंच गए, जहां उन्होंने पहाड़ी धुनों पर नाटी डाली। शनिवार सुबह ये दोनों दल ढोल और करनाल की गूंज के साथ डांगुरू लहराते और पारंपरिक नृत्य करते हुए मैदान में प्रवेश करेंगे। मेले की शुरुआत दोनों दलों के वरिष्ठ ठोडा खिलाड़ियों की ओर से एक-दूसरे पर धनुष से बाण चलाकर की जाएगी, जो इस खेल की ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाता है। ठोडा खेल को महाभारतकाल से जुड़ा माना जाता है। इस खेल में शाठी दल कौरव और पाशी दल पांडवों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इसे केवल खेल ही नहीं बल्कि एक जीवंत ऐतिहासिक परंपरा भी बनाता है। मेले के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में केशव चौहान शिरकत करेंगे, जबकि अंतिम दिन समाजसेवी राजेश गुप्ता कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। अंतिम दिन रस्साकशी प्रतियोगिता करवाई जाएगी। इसमें महिला वर्ग की आठ टीमें भाग लेंगी। इसके अलावा स्थानीय महिला मंडल सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे, जो मेले का मुख्य आकर्षण होंगे। ठोडा बिशू कमेटी देवरी घाट जोधपुर के प्रधान भूपेंद्र वेक्टा ने बताया कि यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। तीन दिन तक चलने वाला यह मेला न केवल खेल प्रतियोगिता बल्कि परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम बनेगा।