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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस मामले में दोषी को तीन महीने की जेल
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दोषी पर दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे शिकायतकर्ता को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह मामला देवी सिंह जिष्टू की ओर से जय राम के खिलाफ दायर किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने जय राम को 1.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी। इसके बाद जय राम ने 2 दिसंबर 2018 को 1.50 रुपये का चेक जारी किया था। यह चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने 18 दिसंबर 2018 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन जय राम ने भुगतान नहीं किया। अदालत ने पाया कि अभियुक्त अपनी देनदारी साबित करने में विफल रहा। उसने अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। अभियुक्त ने दावा किया था कि उसने 2013 में 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया था। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को विश्वसनीय नहीं माना। अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत शिकायतकर्ता के पक्ष में अनुमान को सही माना। अदालत ने कहा कि अभियुक्त इस अनुमान को ठोस सबूतों से खंडित करने में विफल रहा। केवल इन्कार करना देनदारी को नकारने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता ने अपना मामला उचित संदेह से परे साबित किया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे शिकायतकर्ता को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह मामला देवी सिंह जिष्टू की ओर से जय राम के खिलाफ दायर किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने जय राम को 1.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी। इसके बाद जय राम ने 2 दिसंबर 2018 को 1.50 रुपये का चेक जारी किया था। यह चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने 18 दिसंबर 2018 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन जय राम ने भुगतान नहीं किया। अदालत ने पाया कि अभियुक्त अपनी देनदारी साबित करने में विफल रहा। उसने अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। अभियुक्त ने दावा किया था कि उसने 2013 में 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया था। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को विश्वसनीय नहीं माना। अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत शिकायतकर्ता के पक्ष में अनुमान को सही माना। अदालत ने कहा कि अभियुक्त इस अनुमान को ठोस सबूतों से खंडित करने में विफल रहा। केवल इन्कार करना देनदारी को नकारने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता ने अपना मामला उचित संदेह से परे साबित किया है।