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Rampur Bushahar News: तापमान में कमी के बाद सेब के बगीचों की प्रूनिंग में जुटे बागवान
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विशेषज्ञ की सलाह फरवरी तक पूरा करना होगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हल्की बारिश के बाद ठंड बढ़ने पर सेब के पौधों में पतझड़ की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। अब बागवानों ने बगीचों में फ्रूनिंग का काम शुरू कर दिया है। सेब का पौधा तापमान में कमी आने के बाद सुप्त अवस्था में चला जाएगा। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं हुई, पर चोटियों पर हिमपात से शीतलहर बढ़ गई है। ठंड से सेब के पत्ते पीले पड़ने के बाद जैसे ही झड़ेंगे, वही अवस्था सुप्त अवस्था मानी जाती है। इसके लिए औसतन तापमान सात डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। सेब के फल की गुणवत्ता सात डिग्री सेल्सियस से कम का तापमान औसतन 1000 से 1300 घंटे जरूरी है। यदि तय समय में ये चिलिंग ऑवर्स पूरे हो जाएं, तो सेब के पौधों में फल की सेटिंग बहुत अच्छी होती है। सुप्त अवस्था के दौरान ही सेब के बगीचों में टहनियों के काट-छांट का काम शुरू किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ दिसंबर से फरवरी के तक के समय के अनुकूल मानते हैं। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर में पतझड़ के बाद से सेब के पेड़ों की काट-छांट का काम शुरू किया जा सकता है। सेब के पेड़ों की छंटाई का सही समय, मौसम और वहां की भौगोलिक परिस्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर सेब के पेड़ों की छंटाई सर्दियों के अंत में यानी फरवरी तक की जाती है।
प्रशिक्षित लोगों से करवाएं काट-छांट
बागवानी विशेषज्ञ एवं जिला शिमला कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में काट-छांट का काम प्रशिक्षित लोगों से करवाएं। फल लगने से लेकर फल की गुणवत्ता और पौधे के विकास तक पोषक तत्व के बाद प्रूनिंग विशेष महत्व रहता है। सही काट-छांट से पेड़ों को आकार देने में मदद मिलती है। इससे पेड़ों को अच्छे वेंटिलेशन मिलता है और संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है। पेड़ों में बीमारियां कम होती हैं। छंटाई का सबसे अच्छा समय निष्क्रिय मौसम के दौरान होता है। पेड़ की पिछले दो साल से छंटाई नहीं हुई है, तो इस साल ज्यादा छंटाई करें। पेड़ के आधा इंच से अधिक कटे घाव पर साथ-साथ पेस्ट लगाएं। इससे पौधे में संक्रमण की संभावना नहीं रहती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हल्की बारिश के बाद ठंड बढ़ने पर सेब के पौधों में पतझड़ की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। अब बागवानों ने बगीचों में फ्रूनिंग का काम शुरू कर दिया है। सेब का पौधा तापमान में कमी आने के बाद सुप्त अवस्था में चला जाएगा। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं हुई, पर चोटियों पर हिमपात से शीतलहर बढ़ गई है। ठंड से सेब के पत्ते पीले पड़ने के बाद जैसे ही झड़ेंगे, वही अवस्था सुप्त अवस्था मानी जाती है। इसके लिए औसतन तापमान सात डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। सेब के फल की गुणवत्ता सात डिग्री सेल्सियस से कम का तापमान औसतन 1000 से 1300 घंटे जरूरी है। यदि तय समय में ये चिलिंग ऑवर्स पूरे हो जाएं, तो सेब के पौधों में फल की सेटिंग बहुत अच्छी होती है। सुप्त अवस्था के दौरान ही सेब के बगीचों में टहनियों के काट-छांट का काम शुरू किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ दिसंबर से फरवरी के तक के समय के अनुकूल मानते हैं। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर में पतझड़ के बाद से सेब के पेड़ों की काट-छांट का काम शुरू किया जा सकता है। सेब के पेड़ों की छंटाई का सही समय, मौसम और वहां की भौगोलिक परिस्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर सेब के पेड़ों की छंटाई सर्दियों के अंत में यानी फरवरी तक की जाती है।
प्रशिक्षित लोगों से करवाएं काट-छांट
बागवानी विशेषज्ञ एवं जिला शिमला कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में काट-छांट का काम प्रशिक्षित लोगों से करवाएं। फल लगने से लेकर फल की गुणवत्ता और पौधे के विकास तक पोषक तत्व के बाद प्रूनिंग विशेष महत्व रहता है। सही काट-छांट से पेड़ों को आकार देने में मदद मिलती है। इससे पेड़ों को अच्छे वेंटिलेशन मिलता है और संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है। पेड़ों में बीमारियां कम होती हैं। छंटाई का सबसे अच्छा समय निष्क्रिय मौसम के दौरान होता है। पेड़ की पिछले दो साल से छंटाई नहीं हुई है, तो इस साल ज्यादा छंटाई करें। पेड़ के आधा इंच से अधिक कटे घाव पर साथ-साथ पेस्ट लगाएं। इससे पौधे में संक्रमण की संभावना नहीं रहती।
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