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सेब आयात शुल्क घटाने से बागवानी संकट में : वेद
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बोले-निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो बागवान करेंगे उग्र संघर्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। केंद्र सरकार ने हाल ही में किए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत सेब पर आयात शुल्क घटाने के फैसले से हिमाचल प्रदेश के बागवानों में भारी रोष है। इससे बागवानों की आर्थिकी पर संकट खड़ा हो गया है। यह बात जिला युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश ने जारी बयान में कही।उन्होंने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के बागवानों की आर्थिकी पर एक सीधा प्रहार करार दिया है।
वेद प्रकाश ने बताया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के हितों की अनदेखी की है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता कर सेब पर आयात शुल्क को 50 से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। यूरोपीय संघ के साथ समझौते से शुल्क में और भी भारी कटौती करते हुए इसे 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत पर लाया है। वेद प्रकाश का कहना है कि विदेशों से सस्ता सेब भारतीय बाजारों में पहुंचने से हिमाचल के उच्च गुणवत्ता वाले सेब को उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो बागवानों का संघर्ष और उग्र होगा। केंद्र सरकार तुरंत एफटीए समझौतों के तहत घटाए गए आयात शुल्क के फैसले की समीक्षा करे और बागवानों को राहत दे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। केंद्र सरकार ने हाल ही में किए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत सेब पर आयात शुल्क घटाने के फैसले से हिमाचल प्रदेश के बागवानों में भारी रोष है। इससे बागवानों की आर्थिकी पर संकट खड़ा हो गया है। यह बात जिला युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश ने जारी बयान में कही।उन्होंने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के बागवानों की आर्थिकी पर एक सीधा प्रहार करार दिया है।
वेद प्रकाश ने बताया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के हितों की अनदेखी की है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता कर सेब पर आयात शुल्क को 50 से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। यूरोपीय संघ के साथ समझौते से शुल्क में और भी भारी कटौती करते हुए इसे 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत पर लाया है। वेद प्रकाश का कहना है कि विदेशों से सस्ता सेब भारतीय बाजारों में पहुंचने से हिमाचल के उच्च गुणवत्ता वाले सेब को उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो बागवानों का संघर्ष और उग्र होगा। केंद्र सरकार तुरंत एफटीए समझौतों के तहत घटाए गए आयात शुल्क के फैसले की समीक्षा करे और बागवानों को राहत दे।
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