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Rampur Bushahar News: भगवान परशुराम की जयंती पर हुआ चार ठहरियों के देवताओं का भव्य मिलन

Tue, 29 Apr 2025 11:01 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 11:01 PM IST
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Lord Parshuram Jayanti celebrated with great pomp in Laalsa
लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद
तीसरी ठहरी लालसा में धूमधाम से मनाई भगवान परशुराम जयंती, दिनभर चला नाटियों का दौर
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ब्राह्मण महिलाओं ने ब्रह्म भक्ति कर ठहरियों की स्थापना की और पौराणिक गीत गाए


संवाद न्यूज एजेंसी

डंसा/रामपुर बुशहर। रामपुर उपमंडल की नोगवैली में भगवान परशुराम की चार ठहरियों में परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गई। मंगलवार को लालसा स्थित ठहरी में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें चार ठहरियों से आए देवताओं और हजारों ग्रामीणों ने भाग लिया। भगवान परशुराम के जयकारों से समूची नोगवैली क्षेत्र गूंज उठी। ठहरियों की ब्राह्मण महिलाओं ने ब्रह्म भक्ति कर ठहरियों की स्थापना की और पौराणिक गीत गाकर गाए। परशुराम जयंती पर देवताओं का मिलन देख ग्रामीण भावुक हो गए। दिनभर देवता साहब दोगनू महाराज के मंदिर परिसर में नाटियों और नाच गाने का खूब दौर चला। दिनभर लोग देवधुनों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर झूमते रहे। कार्यक्रम में भगवान परशुराम जी की पालकी जेठी ठहरी शनेरी से लालसा पहुंची। उनके साथ देवता साहब दमुख डंसा, देवता साहेब झाहरूनाग शनेरी, देवता साहेब यगेश्वर महाराज शिंगला से पहुंचे। देवता साहब दोगनू ने अपने नवनिर्मित मंदिर प्रांगण में सभी अतिथि देवताओं का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया। इस मौके पर माता मांगलाकली एवं देवता दोगनू मंदिर समिति प्रधान शीश शर्मा, उपप्रधान मनीष शर्मा, हरीश शर्मा, सुनील शर्मा, चंदर शर्मा, पुष्पदेव शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।

श्रापमुक्ति के लिए नोगवैली पहुंचे थे परशुराम
मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान परशुराम ने श्रापमुक्ति के लिए हिमालय का रुख किया था। उन्होंने रामपुर की नोगवैली में चार ठहरियों की स्थापना की थी। इन चारों ठहरियों में भगवान परशुराम को लेकर ग्रामीणों में अपार आस्था है। इन चार ठहरियों में भगवान परशुराम की जयंती धूमधाम से आयोजित होती है। इस वर्ष तीसरी ठहरी लालसा में परशुराम जन्मोत्सव आयोजित किया गया। परशुराम की चारों ठहरियों में मुख्यत: ब्राह्मणों का ही वास है। इस मेले के आयोजन के पीछे विलुप्त होती चार ठहरियों की संस्कृति को पुन: जीवित करना और उसका संरक्षण करना है। आज की युवा पीढ़ी के लिए यह अलौकिक क्षण था। मंदिर समिति लालसा के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए सभी लोगों ने उनकी बहुत सराहना की।

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

लालसा में परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नाचती महिलाएं। संवाद

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