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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Historical temple of deity Bakralu in Dalgaon, Rohru, Shimla

Rampur Bushahar News: पुजारी के अलावा विशेष अवसर पर कन्या को ही मंदिर में प्रवेश की है अनुमति

Fri, 27 Dec 2024 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 11:58 PM IST
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रतन चौहान
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रोहड़ू। दलगांव के देवता बकरालू मंदिर दो जनवरी से 39 साल बाद भूंडा महायज्ञ होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक मंदिर को लेकर आज भी कई रहस्य बरकरार हैं। इस मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन मंदिर का पहली बार निर्माण कब हुआ, इसकी आज भी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। गांवों के बुजुर्गों का कहना है कि जब यह गांव बसा होगा, उसी समय से मंदिर का निर्माण भी हुआ होगा। वहीं, इस मंदिर के नियम भी बहुत कड़े हैं। पुराने मंदिर में पुजारी के अलावा विशेष अवसर पर गांव की कन्या को ही प्रवेश की अनुमति है। बाहरी लोगों और ग्रामीणों को पुराने मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं हैं। देवता बकरालू के मंदिर में एक समय पूजा के लिए पुजारी काे ही गर्भ गृह के अंदर तक प्रवेश की अनुमति रहती है। विशेष आयोजन में कारदार के अलावा देवता की अनुमति पर इस गांव के व्यक्ति विशेष को ही जाना मिलता है। कुछ खास मौके पर केवल इस गांव की कन्या को मंदिर के गर्भ गृह तक प्रवेश दिया जाता है। गांव की बेटी को चौदह साल की उम्र के बाद या गांव से बाहर से ब्याही महिला का ऐतिहासिक मंदिर के अंदर प्रवेश निषेध है। लोक मान्यता के अनुसार, कोई नियमों का उल्लघंन करता है तो खमियाजा भुगतना पड़ता है, इसलिए गांव के लोग पुराने रहस्य पर चर्चा करने पर भी कतराते हैं।
देवता के देवठी या पालकी में होते हैं आम लोगों को दर्शन

ऐतिहासिक मंदिर के साथ बनी देवठी में देवता के निकलने पर ही उनकी मूर्तियों के आम लोग दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा किसी अनुष्ठान या कार्यक्रम के लिए गांव के दौरे पर निकलने के बाद देवता की पालकी के लोगों को दर्शन की अनुमति रहती है।
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पुश्तैनी नियतों का आज भी होता है पालन

देवता बकरालू मंदिर के मोतमीन रधुनाथ झामटा ने बताया कि इस मंदिर में जो नियम पुश्तों से बने हुए हैं। उनका आज भी गंभीरता से पालन किया जाता है। देवभूमि हिमाचल में देवताओं के प्रति लोगों की विशेष आस्था है, इसलिए भूंडा जैसे धार्मिक अनुष्ठान पर लोग करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। उनका कहना है कि देवभूमि में धार्मिक अनुष्ठानों से क्षेत्र की सुख समृद्धि बढ़ती है। दलगांव पंचायत के प्रधान विशेषर बांष्टू ने बताया कि मंदिर में एक समय पूजा के लिए पुजारी के अलावा कारदार कमेटी के चंद लोग ही प्रवेश करते हैं। इस गांव की चौदह साल से कम उम्र की कन्या के अलावा किसी अन्य को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। मंदिर में इस गांव के व्यक्ति विशेष को भी देवता से अनुमति पर किसी खास आयोजन पर अनुमति मिलती है। उनका कहना है कि लोग आज भी मंदिर में सभी नियमों का पूरा पालन करते हैं। -संवाद
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