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Rampur Bushahar News: तापमान के उतार-चढ़ाव से खतरे में बागवानी, पूरे नहीं हो रहे चिंलिंग ऑवर्स

Thu, 06 Feb 2025 11:31 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2025 11:31 PM IST
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Gardening in danger due to temperature fluctuations, chilling hours are not being completed
सेब के बगीचों में प्रूनिंग की जुटे बागवान
सर्दियों में बागवानी के लिए प्रतिकूल मौसम का असर सामने आने लगा, मौसम में बदलाव सेब की फसल के लिए नुकसानदायक
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। इस साल सर्दियों में बागवानी के लिए प्रतिकूल मौसम का असर सामने आने लगा है। निचले क्षेत्रों के कई बगीचों में पौधों से कोंपले निकलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो कई जगह अभी प्रूनिंग का काम पूरा नहीं हुआ है। कम हिमपात और चिंलिंग ऑवर्स पूरा न होना सेब की फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। बागवानी विशेषज्ञ कहते हैं कि चिंलिंग ऑवर्स यानी ठंडे घंटे, पौधों को सुप्तावस्था में जाने में मदद करते हैं। इस अवस्था में पौधों का विकास सही से होता है। सर्दियों में अनुकूल मौसम न होने से तुड़ान के दौरान पौधे के घाव आसानी से नहीं भर पाते, जिससे अंकुरित होने वालीं कोंपलें भी ज्यादा देर टिकी नहीं रहती हैं। बागवानी विभाग के अनुसार इस साल सर्दियों में मौसम दिन के समय पंद्रह से अठारह डिग्री और रात के समय कुछ दिनों को छोड़कर तापमान दो से आठ डिग्री के बीच रहा है। आजकल फिर तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। तापमान में उतार-चढ़ाव को बागवानी के लिए नुकसानदायक माना जाता है। यदि मौसम गर्म रहा, तो सेब की फसल को इसका नुकसान होने की पूरी संभावना है।

बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि दिन के समय मौसम गर्म और आधी रात के बाद ठंडा हो रहा है। सेब के पौधों में शून्य से अधिकतम सात डिग्री तक तापमान की जरूरत रहती है। चिंलिंग ऑवर्स पूरे होने के लिए औसतन तापमान शून्य से सात डिग्री होना चाहिए। इस वर्ष देखा गया है कि बारिश और हिमपात बहुत कम हुआ है। वहीं, औसतन तापमान ऊपर की श्रेणी में पहुंचने से तापमान में कमी होने का क्रम टूट रहा है, जोकि सेब के लिए अधिक नुकसानदायक है। सेब की रायल किस्म के लिए आठ सौ से तेरह सौ चिलिंग ऑवर्स की जरूरत होती है। अर्ली वैरायटी के पौधों के लिए छह से आठ सौ व गाला, अन्य विदेशी किस्मों के लिए चार सौ से छह सौ घंटे चिंलिंग ऑवर्स की जरूरत होती है। चार महीने के दौरान बर्फबारी से तापमान में गिरावट आने पर चिलिंग ऑवर्स की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सर्दियों के चार महीनों में तापमान बारह सौ से सौलह सौ घंटे तापमान सात डिग्री सेल्सियस से कम रहने पर ही चिलिंग ऑवर्स पूरे होते है। इससे पौध मजबूत होने के साथ फल में फल अच्छे लगते हैं, लेकिन इस बार सर्दियों में ऐसा नहीं हुआ है।
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