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चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह की कैद
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:06 PM IST
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रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट रामपुर ने चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह की कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी को सवा लाख रुपये का हर्जाना देने के भी आदेश दिए हैं। महेंद्र सिंह ने भीमाकाली मंदिर ट्रस्ट को 16 अगस्त 2013 को चेक संख्या 001505 के तहत एक लाख रुपये की राशि का भुगतान किया था, जो कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया रामपुर बुशहर में देय था। व्यक्ति ने भीमाकाली ट्रस्ट नर सिंह मंदिर परिसर में एक दुकान 3500 रुपये प्रतिमाह किराये पर ले रखी थी।
दोषी ने मंदिर ट्रस्ट को दो लाख रुपये की किराया राशि नहीं दी थी। इस कारण उसने मंदिर ट्रस्ट को चेक से एक लाख रुपये का भुगतान किया था और यह चेक मंदिर ट्रस्ट के नाम पर काटा गया था। मंदिर ट्रस्ट के नाम पर दिया गया चेक बैंक में बाउंस हो गया था, क्योंकि उसके खाते में उपयुक्त राशि मौजूद नहीं थी। इसके बाद दोषी को 8 नवंबर 2013 को मंदिर ट्रस्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया था कि चेक की पूरी राशि का भुगतान 15 दिन के भीतर किया जाए। इस नोटिस के बाद जब दोषी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो यह मामला कोर्ट में गया। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और रामपुर के एसडीएम ने इस मामले को लेकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत होकर शपथ पत्र और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद पीपीए एक्ट के तहत आरोपी ने 24 अप्रैल 2015 को 25 हजार रुपये जमा करवाए। इसके बाद से 75 हजार रुपये और ब्याज का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट को बताया गया कि नरसिंह मंदिर परिसर में व्यक्ति को दुकान 3500 रुपये प्रतिमाह के किराये पर लीज एग्रीमेंट के तहत दी गई थी। कोर्ट को बताया गया कि दोषी व्यक्ति का दिया गया चेक बैंक में लगाया गया तो खाते में उपयुक्त राशि न होने के कारण वह बाउंस हो गया है। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट पंकज ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है और शिकायतकर्ता को 1 लाख 25 हजार का हर्जाना देने का आदेश दिया है।
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दोषी ने मंदिर ट्रस्ट को दो लाख रुपये की किराया राशि नहीं दी थी। इस कारण उसने मंदिर ट्रस्ट को चेक से एक लाख रुपये का भुगतान किया था और यह चेक मंदिर ट्रस्ट के नाम पर काटा गया था। मंदिर ट्रस्ट के नाम पर दिया गया चेक बैंक में बाउंस हो गया था, क्योंकि उसके खाते में उपयुक्त राशि मौजूद नहीं थी। इसके बाद दोषी को 8 नवंबर 2013 को मंदिर ट्रस्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया था कि चेक की पूरी राशि का भुगतान 15 दिन के भीतर किया जाए। इस नोटिस के बाद जब दोषी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो यह मामला कोर्ट में गया। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और रामपुर के एसडीएम ने इस मामले को लेकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत होकर शपथ पत्र और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद पीपीए एक्ट के तहत आरोपी ने 24 अप्रैल 2015 को 25 हजार रुपये जमा करवाए। इसके बाद से 75 हजार रुपये और ब्याज का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट को बताया गया कि नरसिंह मंदिर परिसर में व्यक्ति को दुकान 3500 रुपये प्रतिमाह के किराये पर लीज एग्रीमेंट के तहत दी गई थी। कोर्ट को बताया गया कि दोषी व्यक्ति का दिया गया चेक बैंक में लगाया गया तो खाते में उपयुक्त राशि न होने के कारण वह बाउंस हो गया है। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट पंकज ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है और शिकायतकर्ता को 1 लाख 25 हजार का हर्जाना देने का आदेश दिया है।
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