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Rampur Bushahar News: पहाड़ों के आंचल पर चिट्टे का दाग, दे रहा सलाखें, छीन रहा घर के चिराग
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दस साल में 15 युवाओं की नशे से मौत, 300 खा चुके जेल की हवा
सैकड़ों युवाओं का नशा मुक्ति केंद्र में चल रहा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। ऊपरी शिमला का पहाड़ों की खूबसूरत वादियों से घिरा सेब बहुल क्षेत्र दुनियाभर में फल उत्पादन के लिए मशहूर है, लेकिन अब पहाड़ों के आंचल पर चिट्टे जैसे खतरनाक नशे का दाग कई युवाओं को सलाखों के पीछे पहुुंचा चुका है और कई घरों के चिराग बुझा चुका है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बसे गांव, जहां कभी सिंथेटिक नशे की कल्पना तक नहीं की जाती थी। आज हाल यह है कि नशा गांव–गांव तक पहुंच चुका है। वर्ष 2025-2026 के बीच ही 94 नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों को पकड़ा जा चुका है। बीते चार साल में रोहड़ू और जुब्बल कोटखाई उपमंडल से करीब 300 युवक चिट्टे के मामलों में जेल की हवा खा चुके हैं। 10 साल में करीब 15 युवाओं की चिट्टे के नशे से जान गई है, जबकि सैकड़ों युवा इसकी लत में फंसकर अपना भविष्य अंधकारमय कर चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई मामलों में परिजन लोकलाज के डर से मौत का असली कारण तक छिपा रहे हैं। कई बच्चे नशा मुक्ति केंद्र में उपचार के लिए भेजे गए हैं, जिससे चिट्टे में फंसे युवाओं और बाहर हो रही मौतों की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।
लोकलाज के डर से छिप रहे नशे से मौत के आंकड़े
आधिकारिक रूप से बीते सात साल में पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार नशे के सेवन से सात युवाओं की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि यह संख्या कहीं अधिक है। बदनामी और लोकलाज के डर से कई परिजन अपने बच्चों की मौत को नशे से जोड़कर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने से कतराते हैं, जिससे सच्चाई दबकर रह जाती है।
गिरोह पकड़े जा चुके
दुर्गम डोडरा–क्वार जैसे क्षेत्रों के युवा भी पुलिस के पकड़े जाने पर जेलों में पहुंच चुके है। वर्ष 2015 से 30 जनवरी 2026 तक रोहड़ू, जुब्बल और चिड़गांव पुलिस थानों में चिट्टे के करीब 300 युवा जेल जा चुके हैं। चिट्टा तस्करी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय शाही महात्मा गिरोह के सरगना समेत 62 गुर्गों को गिरफ्तार किया है। संदीप शाह गिरोह, राजटा गिरोह समेत महिलाएं और युवतियां अलग-अलग स्थानों से पकड़े गए हैं। इसके बावजूद रोहड़ू, जुब्बल, चिड़गांव, कोटखाई, चौपाल में सैंकडों युवा चिट्टे के मामलों में नामजद हो चुके हैं।
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2018 में हुई पहली मौत
चिट्टे से पहली मौत मार्च 2018 में सामने आई थी। इसके बाद वर्ष 2024 में हाटकोटी के पास एक युवक का शव मिला। 2024 में ही वर्ष अक्तूबर में रोहड़ू में एक युवक का शव खेत से बरामद हुआ। तहसील चिड़गांव में भी नशे के ओवरडोज से चार मौतें हो चुकी हैं। छह दिन पहले युवक की पांचवीं मौत का कारण भी चिट्टा बताया जा रहा है। लगातार बढ़ रहे इस नशे को जड़ से खत्म करने के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता सरकार ने शुरू किए, लेकिन अब पंचायत चुनाव का बिगुल बजने के बाद पंचायत स्तर की कमेटियां निष्क्रिय नजर आने लगी हैं।
नशा मुक्ति केंद्र से आए युवक की हुई मौत
एक भुगत भोगी पिता ने बताया कि इकलौते बेटे को नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है। कई महीने बाद वहां से लौटा तो तीन से चार दिन वह घर पर रहा। एक दिन शाम के समय उसके दोस्तों का फोन आया। अगले दिन सुबह घर के पास खेत में बेटे का शव मिला। पता नहीं नशे से मौत हुई या हत्या। उसके साथ कौन लोग शामिल थे, आज तक पता नहीं चला। अब एक साल के समय बीत गया है।
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सैकड़ों युवाओं का नशा मुक्ति केंद्र में चल रहा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। ऊपरी शिमला का पहाड़ों की खूबसूरत वादियों से घिरा सेब बहुल क्षेत्र दुनियाभर में फल उत्पादन के लिए मशहूर है, लेकिन अब पहाड़ों के आंचल पर चिट्टे जैसे खतरनाक नशे का दाग कई युवाओं को सलाखों के पीछे पहुुंचा चुका है और कई घरों के चिराग बुझा चुका है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बसे गांव, जहां कभी सिंथेटिक नशे की कल्पना तक नहीं की जाती थी। आज हाल यह है कि नशा गांव–गांव तक पहुंच चुका है। वर्ष 2025-2026 के बीच ही 94 नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों को पकड़ा जा चुका है। बीते चार साल में रोहड़ू और जुब्बल कोटखाई उपमंडल से करीब 300 युवक चिट्टे के मामलों में जेल की हवा खा चुके हैं। 10 साल में करीब 15 युवाओं की चिट्टे के नशे से जान गई है, जबकि सैकड़ों युवा इसकी लत में फंसकर अपना भविष्य अंधकारमय कर चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई मामलों में परिजन लोकलाज के डर से मौत का असली कारण तक छिपा रहे हैं। कई बच्चे नशा मुक्ति केंद्र में उपचार के लिए भेजे गए हैं, जिससे चिट्टे में फंसे युवाओं और बाहर हो रही मौतों की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।
लोकलाज के डर से छिप रहे नशे से मौत के आंकड़े
आधिकारिक रूप से बीते सात साल में पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार नशे के सेवन से सात युवाओं की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि यह संख्या कहीं अधिक है। बदनामी और लोकलाज के डर से कई परिजन अपने बच्चों की मौत को नशे से जोड़कर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने से कतराते हैं, जिससे सच्चाई दबकर रह जाती है।
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गिरोह पकड़े जा चुके
दुर्गम डोडरा–क्वार जैसे क्षेत्रों के युवा भी पुलिस के पकड़े जाने पर जेलों में पहुंच चुके है। वर्ष 2015 से 30 जनवरी 2026 तक रोहड़ू, जुब्बल और चिड़गांव पुलिस थानों में चिट्टे के करीब 300 युवा जेल जा चुके हैं। चिट्टा तस्करी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय शाही महात्मा गिरोह के सरगना समेत 62 गुर्गों को गिरफ्तार किया है। संदीप शाह गिरोह, राजटा गिरोह समेत महिलाएं और युवतियां अलग-अलग स्थानों से पकड़े गए हैं। इसके बावजूद रोहड़ू, जुब्बल, चिड़गांव, कोटखाई, चौपाल में सैंकडों युवा चिट्टे के मामलों में नामजद हो चुके हैं।
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2018 में हुई पहली मौत
चिट्टे से पहली मौत मार्च 2018 में सामने आई थी। इसके बाद वर्ष 2024 में हाटकोटी के पास एक युवक का शव मिला। 2024 में ही वर्ष अक्तूबर में रोहड़ू में एक युवक का शव खेत से बरामद हुआ। तहसील चिड़गांव में भी नशे के ओवरडोज से चार मौतें हो चुकी हैं। छह दिन पहले युवक की पांचवीं मौत का कारण भी चिट्टा बताया जा रहा है। लगातार बढ़ रहे इस नशे को जड़ से खत्म करने के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता सरकार ने शुरू किए, लेकिन अब पंचायत चुनाव का बिगुल बजने के बाद पंचायत स्तर की कमेटियां निष्क्रिय नजर आने लगी हैं।
नशा मुक्ति केंद्र से आए युवक की हुई मौत
एक भुगत भोगी पिता ने बताया कि इकलौते बेटे को नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है। कई महीने बाद वहां से लौटा तो तीन से चार दिन वह घर पर रहा। एक दिन शाम के समय उसके दोस्तों का फोन आया। अगले दिन सुबह घर के पास खेत में बेटे का शव मिला। पता नहीं नशे से मौत हुई या हत्या। उसके साथ कौन लोग शामिल थे, आज तक पता नहीं चला। अब एक साल के समय बीत गया है।