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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   A six-day nutrition campaign will begin at Saraswatinagar College today

Rampur Bushahar News: सरस्वतीनगर कॉलेज में आज से शुरू होगा छह दिवसीय पोषण अभियान

Sun, 20 Sep 2026 11:45 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:45 PM IST
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विद्यार्थियों और आमजन को पोषण, स्थानीय एवं पारंपरिक आहार के प्रति किया जाएगा जागरूक
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। लाल बहादुर शास्त्री राजकीय महाविद्यालय सरस्वतीनगर में 21 से 26 सितंबर तक छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन होगा। यह संवाद कार्यक्रम राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2026 के तहत होगा। इसका विषय पोषण रसायन सप्ताह, सोचें वैश्विक, खाएं स्थानीय है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन को पोषण, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और स्थानीय एवं पारंपरिक आहार के प्रति जागरूक करना है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर जीआईएसटी, आहार क्रांति और विज्ञान भारती के सहयोग से यह कार्यक्रम हो रहा है। शालू डोगरा इसका समन्वय कर रही हैं। छह दिनों में संगोष्ठी, विद्यालय जागरूकता सत्र, ग्राम स्तर पर अभियान, नुक्कड़ नाटक और पारंपरिक व्यंजन कार्यशाला सहित कई गतिविधियां होंगी। कार्यक्रम का शुभारंभ 21 सितंबर को कॉलेज सभागार में गट मैटर्स विषय पर अंतरराष्ट्रीय हाइब्रिड संगोष्ठी से होगा। 22 और 23 सितंबर को पीएमश्री मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और डीएवी पब्लिक स्कूल सरस्वतीनगर में पोषण की पाठशाला के तहत जागरूकता सत्र होंगे। 24 सितंबर को विद्यार्थी घर-घर पोषण यात्रा के माध्यम से पंचायत क्षेत्र में लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करेंगे। 25 सितंबर को हाटकोटी कैंची में नुक्कड़ नाटक के जरिये पैकेज्ड और जंक फूड के प्रति संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम सभी के लिए निशुल्क और खुला रहेगा, प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी मिलेंगे।

अभियान की शुरुआत 21 सितंबर को गट मैटर्स पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से होगी। 22 और 23 सितंबर को स्कूलों में पोषण की पाठशाला के तहत जागरूकता सत्र होंगे। 24 सितंबर को विद्यार्थी घर-घर पोषण यात्रा निकालकर लोगों को जागरूक करेंगे। 25 सितंबर को हाटकोटी कैंची में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जंक फूड के प्रति चेताया जाएगा। छह दिवसीय कार्यक्रम का समापन 26 सितंबर को होगा। इस दिन कॉलेज परिसर में दादी का दवाखाना नामक पारंपरिक व्यंजन कार्यशाला आयोजित होगी। कार्यशाला में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के पोषण संबंधी महत्व पर जोर दिया जाएगा। आयोजन का लक्ष्य पारंपरिक खान-पान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना है। महाविद्यालय ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की है।
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