{"_id":"5a5b56f44f1c1b86268b4582","slug":"181515935476-rampur-bushahar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपर शिमला में विवाहित बेटियों को दिया साजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपर शिमला में विवाहित बेटियों को दिया साजा
Updated Sun, 14 Jan 2018 09:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर बुशहर। मकर संक्रांति पर अपर शिमला में विवाहित बेटियों और भंाजियों को साजा देने की परंपरा है। मकर संक्रांति पर विवाहित बेटियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है और उनको साजा देेकर विदा किया जाता है। इस बार भी बेटियों को साजा दिया गया।
साजा के तहत मायके से विवाहित बेटियों को पाल्टू (तेल मे तली हुई मिट्मठी पूरियां) और चूड़े टोकरी में भर कर दिए जाते हैं। जो विवाहित बेटियां किसी कारणवश अपने मायके नहीं जा पाती तो उनके मायके वाले खुद पाल्टू और चूड़े उनके ससुराल पहुंचाते हैं। जिला शिमला के रामपुर, ननखड़ी, आनी, निरमंड, रोहड़ू, जुब्ब्ल-कोटखाई, चौपाल और जनजातीय जिला किन्नौर के रिकांगपिओ, छितकुल, सांगला, भावानगर, कल्पा आदि कई इलाकों में मकर संक्रांति पर साजा देना शुभ माना जाता है।
विज्ञापन
साजा के तहत मायके से विवाहित बेटियों को पाल्टू (तेल मे तली हुई मिट्मठी पूरियां) और चूड़े टोकरी में भर कर दिए जाते हैं। जो विवाहित बेटियां किसी कारणवश अपने मायके नहीं जा पाती तो उनके मायके वाले खुद पाल्टू और चूड़े उनके ससुराल पहुंचाते हैं। जिला शिमला के रामपुर, ननखड़ी, आनी, निरमंड, रोहड़ू, जुब्ब्ल-कोटखाई, चौपाल और जनजातीय जिला किन्नौर के रिकांगपिओ, छितकुल, सांगला, भावानगर, कल्पा आदि कई इलाकों में मकर संक्रांति पर साजा देना शुभ माना जाता है।
विज्ञापन