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Rampur Bushahar News: सेब के दाम 400 रुपये तक गिरे, बागवानों में निराशा
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2,600 रुपये प्रति पेटी बिकने वाले सेब के 2,200 रुपये तक पहुंचे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। कंपनियों की ओर से सेब के खरीद दर घोषित किए जाने के बाद भी मंडियों में सेब के दाम में गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को सेब के भाव 200 से 400 रुपये तक कम हो गए। सोमवार को करीब 2,600 रुपये प्रति पेटी बिकने वाला सेब मंगलवार को कई जगहों पर 2,200 रुपये तक पहुंच गया, जिससे बागवानों को भारी निराशा हुई है। एक सेब की पेटी में 20 से 22 किलोग्राम सेब होते हैं।
बागवानों को कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार के कारण सेब की मांग बढ़ने की उम्मीद थी। उन्हें लग रहा था कि त्योहार के दौरान फलों की मांग बढ़ने से मंडियों में सेब के भाव को सहारा मिलेगा। हालांकि, मंगलवार को बाजार का रुख इसके विपरीत रहा। भाव बढ़ने के बजाय नीचे आ गए, जिससे उनकी उम्मीदों को झटका लगा। मंडियों में कुछ चुनिंदा गुणवत्ता वाले सेब को अभी भी अच्छे दाम मिल रहे हैं। बेहतर रंग, आकार और गुणवत्ता वाले सेब की मांग बनी हुई है।
बागवान प्रमोद ठाकुर और विक्रम चौहान ने बताया कि इस वर्ष सेब उत्पादन की लागत लगातार बढ़ी है। खाद, दवाइयों, मजदूरी, तुड़ान, पैकेजिंग और ढुलाई पर अधिक खर्च हो रहा है। सामान्य गुणवत्ता के सेब के दाम में 200 से 400 रुपये तक की गिरावट से उत्पादन लागत निकालना भी चुनौती बन रहा है। कम पैदावार के कारण यह चुनौती और बढ़ गई है। छोटे आकार, कम रंग और ओलावृष्टि से प्रभावित सेब को अपेक्षाकृत कम भाव मिल रहा है।
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बागवानों का कहना है कि कंपनियों के दर खुलने और जन्माष्टमी जैसे त्योहार के चलते उन्हें उम्मीद थी कि मंडियों में सेब की मांग बढ़ेगी। अब बागवानों की नजर आने वाले दिनों में मंडियों में मांग और सेब के भाव पर टिकी है। उन्हें उम्मीद है कि त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने से सेब के दाम में फिर सुधार हो सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। कंपनियों की ओर से सेब के खरीद दर घोषित किए जाने के बाद भी मंडियों में सेब के दाम में गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को सेब के भाव 200 से 400 रुपये तक कम हो गए। सोमवार को करीब 2,600 रुपये प्रति पेटी बिकने वाला सेब मंगलवार को कई जगहों पर 2,200 रुपये तक पहुंच गया, जिससे बागवानों को भारी निराशा हुई है। एक सेब की पेटी में 20 से 22 किलोग्राम सेब होते हैं।
बागवानों को कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार के कारण सेब की मांग बढ़ने की उम्मीद थी। उन्हें लग रहा था कि त्योहार के दौरान फलों की मांग बढ़ने से मंडियों में सेब के भाव को सहारा मिलेगा। हालांकि, मंगलवार को बाजार का रुख इसके विपरीत रहा। भाव बढ़ने के बजाय नीचे आ गए, जिससे उनकी उम्मीदों को झटका लगा। मंडियों में कुछ चुनिंदा गुणवत्ता वाले सेब को अभी भी अच्छे दाम मिल रहे हैं। बेहतर रंग, आकार और गुणवत्ता वाले सेब की मांग बनी हुई है।
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बागवान प्रमोद ठाकुर और विक्रम चौहान ने बताया कि इस वर्ष सेब उत्पादन की लागत लगातार बढ़ी है। खाद, दवाइयों, मजदूरी, तुड़ान, पैकेजिंग और ढुलाई पर अधिक खर्च हो रहा है। सामान्य गुणवत्ता के सेब के दाम में 200 से 400 रुपये तक की गिरावट से उत्पादन लागत निकालना भी चुनौती बन रहा है। कम पैदावार के कारण यह चुनौती और बढ़ गई है। छोटे आकार, कम रंग और ओलावृष्टि से प्रभावित सेब को अपेक्षाकृत कम भाव मिल रहा है।
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बागवानों का कहना है कि कंपनियों के दर खुलने और जन्माष्टमी जैसे त्योहार के चलते उन्हें उम्मीद थी कि मंडियों में सेब की मांग बढ़ेगी। अब बागवानों की नजर आने वाले दिनों में मंडियों में मांग और सेब के भाव पर टिकी है। उन्हें उम्मीद है कि त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने से सेब के दाम में फिर सुधार हो सकता है।