{"_id":"66c4a5ea87d7ab078f079b51","slug":"the-drug-addicts-are-increasing-the-worries-of-the-doctors-by-getting-into-trouble-make-a-guard-arrangement-or-provide-security-mandi-news-c-90-1-ssml1025-133714-2024-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: नशेड़ी तीमारदार उलझकर बढ़ा रहे डॉक्टरों की चिंता, गार्ड व्यवस्था बनाएं या सुरक्षा करें\nस्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा.... अभियान एक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: नशेड़ी तीमारदार उलझकर बढ़ा रहे डॉक्टरों की चिंता, गार्ड व्यवस्था बनाएं या सुरक्षा करें स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा.... अभियान एक
Tue, 20 Aug 2024 07:49 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Tue, 20 Aug 2024 07:49 PM IST
विज्ञापन
असाईनमेंट: जोनल अस्पताल मंडी में तैनात स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दुष्यंत । संवाद
नशेड़ी तीमारदार उलझकर बढ़ा रहे डॉक्टरों की चिंता, गार्ड व्यवस्था बनाएं या सुरक्षा करें
अस्पतालों में अधिकतर नशेड़ी तीमारदार बिगाड़ रहे माहौल, सहम रहे डॉक्टर
कम स्टाफ के चलते देर रात को भी महिला डॉक्टरों को देनी पड़ रहीं सेवाएं
महिला डॉक्टरों के लिए अलग से रेस्ट रूम व शौचालय की व्यवस्था, ओपीडी में बढ़ रही दिक्कतें
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिले के अधिकतर चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की सुरक्षा मात्र सुरक्षा कर्मचारियों के हवाले है, जबकि अस्पतालों में पुलिस कर्मचारियों की दरकार है। जोनल अस्पताल मंडी में महिला डॉक्टरों के लिए अलग से रेस्ट रूम, शौचालय समेत अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। बस ओपीडी में एक साथ मरीजों की भीड़ और तीमारदार ओपीडी में घुस जाए तो डॉक्टर सहम जाते हैं। इमरजेंसी ओपीडी में भी रात को दुर्घटना के मामलों में मौत होने पर डॉक्टरों को अपनी सुरक्षा की चिंता हो जाती है। कम स्टाफ के चलते देर रात को भी महिला डॉक्टरों को सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
जोनल अस्पताल मंडी में सेवारत पुरुष और महिला चिकित्सकों की सुरक्षा को और पुख्ता करने की जरूरत है। अस्पताल में सुरक्षा का जिम्मा सिक्योरिटी गार्ड के हवाले है। पुलिस गुमटी तो है, लेकिन पुलिस केवल दुर्घटना के मामलों की सूचना देने तक सीमित रहती है। यहां दिन के समय सभी ओपीडी के बाहर एक-एक सुरक्षा कर्मी तैनात रहता है, जिन्हें भीड़ संभालना ही मुश्किल हो जाती है।
अस्पताल में तैनात स्टाफ की मानें तो अधिकतर मामलों में नशेड़ी तीमारदार ही चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ से उलझते हैं। ऐसे स्थिति में उन्हें खुद का बचाव करना मुश्किल हो जाता है। इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस जवानों की तैनाती बेहद जरूरी है। कई मामलों में डॉक्टर को तीमारदारों से उलझने की बजाए रेस्ट रूम में ही जाना पड़ता है, ताकि सुरक्षित रहें।
विज्ञापन
इस बारे में जोनल अस्पताल के एमएस डॉ. धर्म सिंह वर्मा का कहना है कि चिकित्सकों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है। ओपीडी और वार्डों में सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। पुलिस कर्मचारियों की तैनाती के लिए प्रयासरत हैं।
-- -- -
नशेड़ी करते हैं माहौल खराब : डॉ. दुष्यंत
जोनल अस्पताल में सेवाएं दे रहे डॉ. दुष्यंत ने बताया कि मरीजों के साथ आने वाले नशेड़ी तीमारदार माहौल खराब करते हैं। बताया कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मी केवल मरीजों को नियम बताने और मार्गदर्शन करने तक ही सीमित हैं। ऐसे में अस्पतालों में पुलिस कर्मी तैनात रहने चाहिए।
कई बार उलझ जाते हैं नशेड़ी : डॉक्टर प्रिया
महिला चिकित्सक डॉ. प्रिया ने बताया कि सुरक्षा कर्मी के मौजूद न होने पर अक्सर ओपीडी में लोगों की भारी भीड़ एक साथ अंदर पहुंच जाती है। कई बार नशेड़ी प्रवृत्ति के लोग उनसे उलझ जाते हैं। ऐसे में मजबूरन या तो रेस्ट रूम में जाना पड़ता है या वार्डों में मरीजों के बीच जाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज नेरचौक में हर समय रहती है पुलिस की नजर
नेरचौक (मंडी)। नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां पर सुरक्षा कर्मचारियों के अलावा सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रहती है। अस्पताल के अंदर पुलिस सहायता कक्ष है, जहां पर हर समय पुलिस कर्मचारी तैनात रहते हैं। रात्रि को भी हर समय हर वार्ड में सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं। महिलाओं के लिए विशेष तौर पर महिला ड्यटी रूम की व्यवस्था की गई। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में छात्रावास में सीसीटीवी के भी पुख्ता प्रबंध हैं। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रधानाचार्य डॉ डीके वर्मा ने कहा कि डॉक्टरों विशेष तौर पर महिला स्टाफ की सुरक्षा के लिए गंभीर हैं।
विज्ञापन
अस्पतालों में अधिकतर नशेड़ी तीमारदार बिगाड़ रहे माहौल, सहम रहे डॉक्टर
कम स्टाफ के चलते देर रात को भी महिला डॉक्टरों को देनी पड़ रहीं सेवाएं
महिला डॉक्टरों के लिए अलग से रेस्ट रूम व शौचालय की व्यवस्था, ओपीडी में बढ़ रही दिक्कतें
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिले के अधिकतर चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की सुरक्षा मात्र सुरक्षा कर्मचारियों के हवाले है, जबकि अस्पतालों में पुलिस कर्मचारियों की दरकार है। जोनल अस्पताल मंडी में महिला डॉक्टरों के लिए अलग से रेस्ट रूम, शौचालय समेत अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। बस ओपीडी में एक साथ मरीजों की भीड़ और तीमारदार ओपीडी में घुस जाए तो डॉक्टर सहम जाते हैं। इमरजेंसी ओपीडी में भी रात को दुर्घटना के मामलों में मौत होने पर डॉक्टरों को अपनी सुरक्षा की चिंता हो जाती है। कम स्टाफ के चलते देर रात को भी महिला डॉक्टरों को सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
जोनल अस्पताल मंडी में सेवारत पुरुष और महिला चिकित्सकों की सुरक्षा को और पुख्ता करने की जरूरत है। अस्पताल में सुरक्षा का जिम्मा सिक्योरिटी गार्ड के हवाले है। पुलिस गुमटी तो है, लेकिन पुलिस केवल दुर्घटना के मामलों की सूचना देने तक सीमित रहती है। यहां दिन के समय सभी ओपीडी के बाहर एक-एक सुरक्षा कर्मी तैनात रहता है, जिन्हें भीड़ संभालना ही मुश्किल हो जाती है।
विज्ञापन
अस्पताल में तैनात स्टाफ की मानें तो अधिकतर मामलों में नशेड़ी तीमारदार ही चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ से उलझते हैं। ऐसे स्थिति में उन्हें खुद का बचाव करना मुश्किल हो जाता है। इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस जवानों की तैनाती बेहद जरूरी है। कई मामलों में डॉक्टर को तीमारदारों से उलझने की बजाए रेस्ट रूम में ही जाना पड़ता है, ताकि सुरक्षित रहें।
विज्ञापन
इस बारे में जोनल अस्पताल के एमएस डॉ. धर्म सिंह वर्मा का कहना है कि चिकित्सकों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है। ओपीडी और वार्डों में सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। पुलिस कर्मचारियों की तैनाती के लिए प्रयासरत हैं।
नशेड़ी करते हैं माहौल खराब : डॉ. दुष्यंत
जोनल अस्पताल में सेवाएं दे रहे डॉ. दुष्यंत ने बताया कि मरीजों के साथ आने वाले नशेड़ी तीमारदार माहौल खराब करते हैं। बताया कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मी केवल मरीजों को नियम बताने और मार्गदर्शन करने तक ही सीमित हैं। ऐसे में अस्पतालों में पुलिस कर्मी तैनात रहने चाहिए।
कई बार उलझ जाते हैं नशेड़ी : डॉक्टर प्रिया
महिला चिकित्सक डॉ. प्रिया ने बताया कि सुरक्षा कर्मी के मौजूद न होने पर अक्सर ओपीडी में लोगों की भारी भीड़ एक साथ अंदर पहुंच जाती है। कई बार नशेड़ी प्रवृत्ति के लोग उनसे उलझ जाते हैं। ऐसे में मजबूरन या तो रेस्ट रूम में जाना पड़ता है या वार्डों में मरीजों के बीच जाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज नेरचौक में हर समय रहती है पुलिस की नजर
नेरचौक (मंडी)। नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां पर सुरक्षा कर्मचारियों के अलावा सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रहती है। अस्पताल के अंदर पुलिस सहायता कक्ष है, जहां पर हर समय पुलिस कर्मचारी तैनात रहते हैं। रात्रि को भी हर समय हर वार्ड में सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहते हैं। महिलाओं के लिए विशेष तौर पर महिला ड्यटी रूम की व्यवस्था की गई। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में छात्रावास में सीसीटीवी के भी पुख्ता प्रबंध हैं। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रधानाचार्य डॉ डीके वर्मा ने कहा कि डॉक्टरों विशेष तौर पर महिला स्टाफ की सुरक्षा के लिए गंभीर हैं।

असाईनमेंट: जोनल अस्पताल मंडी में तैनात स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दुष्यंत । संवाद

असाईनमेंट: जोनल अस्पताल मंडी में तैनात स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दुष्यंत । संवाद

असाईनमेंट: जोनल अस्पताल मंडी में तैनात स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दुष्यंत । संवाद

असाईनमेंट: जोनल अस्पताल मंडी में तैनात स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दुष्यंत । संवाद

असाईनमेंट: जोनल अस्पताल मंडी में तैनात स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दुष्यंत । संवाद