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डायरिया में ओआरएस का घोल पिलाएं : सीएमओ
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क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के एमसीएच अस्पताल में आयोजित जागरूकता शिविर में लोगों को जागरूक करते विभ
- फोटो : Mandi
मंडी। मातृ एवं शिशु अस्पताल मंडी में उल्टी-दस्त को लेकर एक दिवसीय जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र शर्मा ने की।
उन्होंने कर्मचारियों और महिलाओं को बरसात में होने वाली उल्टी-दस्त रोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया की उल्टी-दस्त होने से शरीर में जरूरी नमक और पानी निकल जाता है। इससे की शरीर का पोषण छीन जाता है।
डॉ. देवेंद्र ने कहा कि यदि बच्चों में दस्त हो जाए तो बच्चा कमजोर और कुपोषित हो जाता है। निर्जलीकरण से मौत हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व की 10 लाख मौतें दस्त के कारण होती है और बच्चों में डायरिया मौत का बड़ा कारण है।
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उन्होंने बताया कि ओआरएस के सेवन से 93 प्रतिशत मौतों को बचाया जा सकता है। इसी उद्ेदश्य से पूरे विश्व में 29 जुलाई को विश्व ओआरएस दिवस मनाया गया। डॉ. देवेंद्र ने बताया कि जिला में संघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ जून 2022 के अंतर्गत आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जा कर लोगों को ओआरएस और जिंक के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया था। इस दौरान स्वास्थ्य शिक्षक सोहन लाल ने बताया कि घर पर भी ओआरएस घोल बनाएं और 6 माह से छोटे बच्चों को मां का दूध पिलाते रहें। बोतल से दूध न पिलाएं बार-बार हाथ धोते रहें।
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उन्होंने कर्मचारियों और महिलाओं को बरसात में होने वाली उल्टी-दस्त रोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया की उल्टी-दस्त होने से शरीर में जरूरी नमक और पानी निकल जाता है। इससे की शरीर का पोषण छीन जाता है।
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डॉ. देवेंद्र ने कहा कि यदि बच्चों में दस्त हो जाए तो बच्चा कमजोर और कुपोषित हो जाता है। निर्जलीकरण से मौत हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व की 10 लाख मौतें दस्त के कारण होती है और बच्चों में डायरिया मौत का बड़ा कारण है।
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उन्होंने बताया कि ओआरएस के सेवन से 93 प्रतिशत मौतों को बचाया जा सकता है। इसी उद्ेदश्य से पूरे विश्व में 29 जुलाई को विश्व ओआरएस दिवस मनाया गया। डॉ. देवेंद्र ने बताया कि जिला में संघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ जून 2022 के अंतर्गत आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जा कर लोगों को ओआरएस और जिंक के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया था। इस दौरान स्वास्थ्य शिक्षक सोहन लाल ने बताया कि घर पर भी ओआरएस घोल बनाएं और 6 माह से छोटे बच्चों को मां का दूध पिलाते रहें। बोतल से दूध न पिलाएं बार-बार हाथ धोते रहें।