{"_id":"6963e32479ede0c44a067918","slug":"railway-board-to-build-museum-in-jogindernagar-mandi-news-c-90-1-mnd1001-182280-2026-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: जोगिंद्रनगर में रेलवे बोर्ड बनाएगा संग्रहालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: जोगिंद्रनगर में रेलवे बोर्ड बनाएगा संग्रहालय
विज्ञापन
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर में 1924 में निर्मित रेलवे स्टेशन में जल्द रेलवे बोर्ड का संग्रहालय बनेगा। यहां सदी पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होगा। केंद्रीय रेल मंत्रालय ने इसकी संभावनाएं तलाश कर सौ साल पुराने उपकरणों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर इसकी कवायद शुरू कर दी है।
नैरोगेज रेललाइन पर रेलगाड़ी के आरंभ के दौरान सिग्नल और अन्य उपकरणों का संरक्षण होगा। रेल मंत्रालय के हेरिटेज विभाग की कार्यकारी निदेशक आशिमा मेहरोत्रा की अगुवाई में रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की ओर से किए गए निरीक्षण में ऐसी धरोहरें मिली हैं जिनका इस्तेमाल सौ साल पहले रेलगाड़ियों के संचालन के दौरान किया गया था। रेलवे विभाग की इन धरोहरों को पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए मुख्य रेलवे स्टेशनों में इस योजना का प्रोजेक्ट धरातल में उतारने के लिए विशेष सर्वेक्षण शुरू हुआ है।
रेलवे ट्रैक पर आज भी मौजूद है धरोहरें
ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बीसी बैटी ने यहां पर प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए भारी मशीनरी को पहुंचाने के लिए पठानकोट से जोगिंद्रनगर और शानन तक 164 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण करवाया था। जब पहली यात्री रेलगाड़ी शुरू हुई तो उस दौरान इस्तेमाल में लाए गए सिग्नल, लाइटों के अलावा ऐसी मशीनरी और धरोहरें अभी भी मौजूद हैं। रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रविंद्र रावत का कहना है कि सदी पुरानी धरोहरों को संग्रहालय में संजोने से इसका संरक्षण भी बढ़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
नैरोगेज रेललाइन पर रेलगाड़ी के आरंभ के दौरान सिग्नल और अन्य उपकरणों का संरक्षण होगा। रेल मंत्रालय के हेरिटेज विभाग की कार्यकारी निदेशक आशिमा मेहरोत्रा की अगुवाई में रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की ओर से किए गए निरीक्षण में ऐसी धरोहरें मिली हैं जिनका इस्तेमाल सौ साल पहले रेलगाड़ियों के संचालन के दौरान किया गया था। रेलवे विभाग की इन धरोहरों को पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए मुख्य रेलवे स्टेशनों में इस योजना का प्रोजेक्ट धरातल में उतारने के लिए विशेष सर्वेक्षण शुरू हुआ है।
विज्ञापन
रेलवे ट्रैक पर आज भी मौजूद है धरोहरें
ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बीसी बैटी ने यहां पर प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए भारी मशीनरी को पहुंचाने के लिए पठानकोट से जोगिंद्रनगर और शानन तक 164 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण करवाया था। जब पहली यात्री रेलगाड़ी शुरू हुई तो उस दौरान इस्तेमाल में लाए गए सिग्नल, लाइटों के अलावा ऐसी मशीनरी और धरोहरें अभी भी मौजूद हैं। रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रविंद्र रावत का कहना है कि सदी पुरानी धरोहरों को संग्रहालय में संजोने से इसका संरक्षण भी बढ़ेगा।
विज्ञापन