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Mandi News: अब संधोल-हारसीपतन में नौका विहार में कर सकेंगे लोग

Sun, 26 May 2024 05:29 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2024 05:29 AM IST
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Now people will be able to go boating in Sandhol-Harsipatan
20 मिनट नौका विहार करने के लिए के चुकाने पड़ेंगे 800 रुपये, तहसीलदार ओशीन शर्मा ने किया शुभारंभ
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ब्यास में बोटिंग शुरू करवाकर बेरोजगार युवक ने लगाए संधोल में पर्यटन काे पंख
संवाद न्यूज एजेंसी
संधोल (मंडी)। अब लोग और पर्यटक संधोल-हारसीपतन में भी नौका विहार कर सकेंगे । दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी छोड़ने के बाद बेरोजगार हमीरपुर जिला के युवक विक्रम ने संधोल हारसीपतन में ब्यास नदी पर नौका विहार (बोटिंग) शुरु करवाकर पर्यटन को नए पंख लगाए हैं। 5 साल सरकारी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अब प्रशासन ने हरी झंडी दे दी है। यहां पर बोटिंग के लिए 20 मिनट के सफर में लोगों को 800 रुपये चुकाने पड़ेंगे। हाल ही में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी सहायक आयुक्त राजस्व एवं तहसीलदार संधोल ओशीन शर्मा ने इसका शुभारंभ किया और बोटिंग कर ब्यास नदी को निहारा।
जिला मुख्यालय मंडी से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर तीन जिलों के संगम स्थल संधोल (बड़ोर शहर-हारसीपतन) में पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इन दिनों पड़ रही प्रचंड गर्मी के चलते यहां नौका विहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। लोग परिवार और बच्चों सहित यहां लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। यह स्थल जिला कांगड़ा के जयसिंहपुर से मात्र 8 किलोमीटर, जिला हमीरपुर के सुजानपुर से मात्र 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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यहां करीब दो माह पहले नौका उतारी गई थी, लेकिन प्रशासन ने जरूरी औपचारिकताएं पूरी न होने पर इसे बंद करवा दिया था। अब सभी औपचारिकताओं के पूरा होने पर नौका विहार के लिए हरी झंडी मिल गई है। जिला मंडी के प्रवेशद्वार संधोल का बड़ोर शहर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पुराने समय में यह क्षेत्र पेप्सू पंजाब के साथ सीमा साझा करता था और लगभग 1625ई में मंडी रियासत के राजा सूरज सेन को संधोल क्षेत्र नूरपुर रियासत से दहेज के रूप में प्राप्त हुआ था। यह क्षेत्र व्यापारिक दृष्टि से भी काफी प्रसिद्ध था। यहां से एक तरफ बाकर खड्ड के पार हमीरपुर जिला है तो दूसरी ओर ब्यास नदी के पार कांगड़ा जिला है।
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देश-प्रदेश की यात्रा के लिए सदियों तक यहां के लोगों के लिए एकमात्र जरिया व्यास नदी पर तैरने वाली नाव रही है। दशक भर से अब इस नाव का भार हारसीपतन पुल ने उठा लिया है और नाव लुप्त हो चुकी है। अब फिर से यहां आधुनिक नाव के उतरने से नौका विहार अर्थात बोटिंग के शौकीन लोगों के लिए बेहतर विकल्प मिला है। नेरी पंचायत के प्रधान जितेंद्र जमवाल ने कहा कि निश्चित तौर पर इस पहल से इससे पर्यटन को पंख लेंगे।


कोट्स
तत्तापानी की तरह जलक्रीड़ाओं के लिए यहां पर वर्ष 2019 से प्रयासरत थे। 5 साल बाद अब इसकी स्वीकृति मिली है। यहां करीब ढाई किलोमीटर का यह सफर निश्चित तौर पर सभी को रोमांचित करने वाला है। फिलहाल यहां एक बड़ी बोट और दो छोटी बोट से एडवेंचर करवाया जा रहा है।
-विक्रम, संचालक
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