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Mandi News: अब रिमोट सेंसिंग से होगा फसलों का आकलन

Sat, 31 May 2025 12:03 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 31 May 2025 12:03 AM IST
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Now crops will be assessed through remote sensing
मंडी। कृषि-बागवानी क्षेत्र में मौसम संबंधित आकलन और विकास कार्यों का सर्वेक्षण करने को लेकर भविष्य से अब उपग्रहों की मदद से जानकारी ली जाएगी। पहले बारिश, अंधड़ से फसलों को हाेने वाले नुकसान और अन्य तरह के सर्वेक्षण के लिए विभागीय कर्मचारियों को फील्ड में जाना पड़ता था। भविष्य में अब यह कार्य उपग्रहों की मदद से संभव होगा।
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कार्यालयों में बैठे-बैठे ही अब रिमोट सेंसिंग की मदद से इस कार्य को आसानी से किया जा सकेगा। इस तकनीक को अन्य राज्यों में फसलों संबंधी नुकसान के आकलन और घटना-दुर्घटनाओं का पता लगाने में प्रयोग किया जाता रहा है। शीघ्र ही केंद्र की ओर से इसे हिमाचल में भी शुरू किया जाएगा। पिछले दिनों इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग संस्थान देहरादून में रिमोट सेंसिंग को लेकर एक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देशभर से कृषि बागवानी विभागों के अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में मंडी जिले से चार अधिकारी भी शामिल रहे। इनमें मंडी से जिला कृषि उप निदेशक आरसी चौधरी, फार्मा प्रशिक्षण केंद्र सुंदरनगर की प्राचार्य प्राची, जिला कृषि अधिकारी जयंत रत्ना और एसोसिएट स्वाट सर्विस अधिकारी सोनल गुप्ता शामिल रहे।
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...रिमोट सेंसिंग तकनीक के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का सहयोग लिया जाएगा। इस तकनीक की मदद से किसी भी जिला या क्षेत्र के भूभाग में फसलों को हुए नुकसान या अन्य तरह के विकास कार्यों का जायजा लिया जाएगा। अभी इसके लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद ही इस तकनीक का इस्तेमाल हो पाएगा।
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-राम चंद्र चौधरी, जिला कृषि उप निदेशक मंडी

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क्या है रिमोट सेंसिंग तकनीक
रिमोट सेंसिंग तकनीक से आम तौर पर उपग्रह से किसी क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं का पता लगाना और क्षेत्र की निगरानी की जा सकती है। इसके लिए दूर से उपग्रह की मदद से चित्र एकत्र किए जाते हैं, जो शोधकर्ताओं को पृथ्वी के बारे में चीजों को समझने में मदद करते हैं। इससे मौसम का पूर्वानुमान लगाने, फटते ज्वालामुखी को आसानी से देखना, किसी शहर के विकास और कृषि भूमि या वनों में हो रहे परिवर्तनों पर नजर रखी जा सकती है।
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