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Mandi News: भूस्खलन से खतरे में जान, डकबगड़ा से बजगर तक हाईवे पर गिर रही चट्टानें
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पठानकोट हाईवे पर चौंतड़ा के समीप डकबगड़ा में दरकता पहाड़। संवाद
स्थानीय लोगों ने की अर्ली वार्निंग सिस्टम और वैज्ञानिक सर्वे की मांग
चट्टानों के गिरने से हाईवे की सुरक्षा रेलिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोगिंद्रनगर से करीब आठ किलोमीटर दूर डकबगड़ा और बजगर के बीच सफर जानलेवा होता जा रहा है। अत्यधिक नमी के कारण पहाड़ लगातार दरक रहे हैं, जिससे हाईवे पर मलबा और भारी चट्टानें गिर रही हैं। बीते अगस्त और सितंबर माह में यहां चार बार हुए भूस्खलन के दौरान कई वाहन और परिवहन निगम की बसें हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचीं। वहीं, घटासनी और उरला के समीप दरकते पेड़ों ने भी यातायात सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
मलबे और चट्टानों के गिरने से हाईवे की सुरक्षा रेलिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके बावजूद एनएचएआई की ओर से अभी तक क्षेत्र में कोई चेतावनी बोर्ड स्थापित नहीं किया गया है। स्थानीय वाहन चालकों विनोद कुमार, अश्वनी और कमल का कहना है कि डकबगड़ा के तीखे मोड़ के पास लगातार गिरती चट्टानों के कारण राहगीरों और वाहन चालकों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है।
सामरिक महत्व के इस मार्ग पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने विभाग से तत्काल पुख्ता सुरक्षा उपाय करने और संभावित हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उधर, एनएचएआई के साइट इंजीनियर अंकित ने बताया कि भूस्खलन से हाईवे और विभागीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। सड़क की सफाई के लिए मौके पर जेसीबी मशीन तैनात कर दी गई है। मलबा तत्काल हटाया जा रहा है। जल्द ही क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड स्थापित करने के साथ सुरक्षा डंगे लगाने का काम भी शुरू किया जाएगा।
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बॉक्स डकबगड़ा और बजगर के समीप पहाड़ी दरकने से वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। एनएचएआई को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल आवश्यक कदम उठाने चाहिए।-विजय जम्वाल, स्थानीय निवासी
चौंतड़ा के समीप दरकते पहाड़ों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण बेहद जरूरी है। एनएचएआई को इस भूस्खलन संभावित क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करना चाहिए, ताकि समय रहते अनहोनी को टाला जा सके। -साहिल वालिया, स्थानीय निवासी
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चट्टानों के गिरने से हाईवे की सुरक्षा रेलिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोगिंद्रनगर से करीब आठ किलोमीटर दूर डकबगड़ा और बजगर के बीच सफर जानलेवा होता जा रहा है। अत्यधिक नमी के कारण पहाड़ लगातार दरक रहे हैं, जिससे हाईवे पर मलबा और भारी चट्टानें गिर रही हैं। बीते अगस्त और सितंबर माह में यहां चार बार हुए भूस्खलन के दौरान कई वाहन और परिवहन निगम की बसें हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचीं। वहीं, घटासनी और उरला के समीप दरकते पेड़ों ने भी यातायात सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
मलबे और चट्टानों के गिरने से हाईवे की सुरक्षा रेलिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके बावजूद एनएचएआई की ओर से अभी तक क्षेत्र में कोई चेतावनी बोर्ड स्थापित नहीं किया गया है। स्थानीय वाहन चालकों विनोद कुमार, अश्वनी और कमल का कहना है कि डकबगड़ा के तीखे मोड़ के पास लगातार गिरती चट्टानों के कारण राहगीरों और वाहन चालकों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है।
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सामरिक महत्व के इस मार्ग पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने विभाग से तत्काल पुख्ता सुरक्षा उपाय करने और संभावित हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उधर, एनएचएआई के साइट इंजीनियर अंकित ने बताया कि भूस्खलन से हाईवे और विभागीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। सड़क की सफाई के लिए मौके पर जेसीबी मशीन तैनात कर दी गई है। मलबा तत्काल हटाया जा रहा है। जल्द ही क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड स्थापित करने के साथ सुरक्षा डंगे लगाने का काम भी शुरू किया जाएगा।
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बॉक्स डकबगड़ा और बजगर के समीप पहाड़ी दरकने से वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। एनएचएआई को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल आवश्यक कदम उठाने चाहिए।-विजय जम्वाल, स्थानीय निवासी
चौंतड़ा के समीप दरकते पहाड़ों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण बेहद जरूरी है। एनएचएआई को इस भूस्खलन संभावित क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करना चाहिए, ताकि समय रहते अनहोनी को टाला जा सके। -साहिल वालिया, स्थानीय निवासी