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Mandi News: सायर पर्व के बाद सड़कों पर बिखरी पूजन सामग्री
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मंडी शहर के चौहटा बाजार में सायर पर्व के बाद चौराहे के किनारे फेंकी गई पूजा सामग्री। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। शहर में सायर पर्व पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सायर पूजन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से लोग प्राकृतिक सामग्री लेकर शहर पहुंचते हैं और इसकी बिक्री करते हैं।
पूजन के लिए धान की बालियां, पेठा, कूरी, कोठा, मक्की और खट्टा जैसी सामग्री 40 से 50 रुपये में बेची जाती है। पर्व से दो दिन पहले ही ग्रामीण बोरियों में सामग्री भरकर सेरी मंच, चौहटा बाजार, स्कूल बाजार, इंदिरा मार्केट की छत और सुकेती पुल सहित शहर के प्रमुख स्थानों पर पहुंच जाते हैं।
इसके अलावा कई लोग घर-घर जाकर भी पूजन सामग्री बेचते हैं। हालांकि, पर्व संपन्न होने के बाद बची हुई सामग्री को शहर की गलियों, चौराहों और सड़कों पर ही छोड़ दिया जाता है।
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इससे जगह-जगह बिखरा कचरा शहर की सुंदरता को प्रभावित करने के साथ-साथ नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा करता है। इस समस्या पर चिंता जताते हुए शहर के बुद्धिजीवियों राजेश कुमार, हेमराज, गीता देवी, चंपा शर्मा, हर्ष कुमार, पुरुषोत्तम चंद और डीके वर्मा ने जिला प्रशासन और नगर निगम से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सायर और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान पूजन सामग्री, फूल-मालाएं और सजावटी सामान बेचने वाले विक्रेताओं का पंजीकरण किया जाए तथा उनके पास उपलब्ध सामग्री का भी आकलन रखा जाए। यदि पर्व के बाद सड़कों पर लावारिस सामग्री बिखरी मिलती है, तो संबंधित विक्रेताओं की पहचान कर उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस संबंध में नगर निगम अध्यक्ष सुमन ठाकुर ने कहा कि भविष्य में त्योहारी सीजन के दौरान विक्रेताओं को सख्त हिदायत दी जाएगी कि बचा हुआ सामान सड़कों पर न फेंकें और उसे अपने साथ वापस ले जाएं। इसके लिए विक्रेताओं के नाम, पते और फोन नंबर का पंजीकरण किया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति शहर में गंदगी फैलाता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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मंडी। शहर में सायर पर्व पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सायर पूजन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से लोग प्राकृतिक सामग्री लेकर शहर पहुंचते हैं और इसकी बिक्री करते हैं।
पूजन के लिए धान की बालियां, पेठा, कूरी, कोठा, मक्की और खट्टा जैसी सामग्री 40 से 50 रुपये में बेची जाती है। पर्व से दो दिन पहले ही ग्रामीण बोरियों में सामग्री भरकर सेरी मंच, चौहटा बाजार, स्कूल बाजार, इंदिरा मार्केट की छत और सुकेती पुल सहित शहर के प्रमुख स्थानों पर पहुंच जाते हैं।
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इसके अलावा कई लोग घर-घर जाकर भी पूजन सामग्री बेचते हैं। हालांकि, पर्व संपन्न होने के बाद बची हुई सामग्री को शहर की गलियों, चौराहों और सड़कों पर ही छोड़ दिया जाता है।
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इससे जगह-जगह बिखरा कचरा शहर की सुंदरता को प्रभावित करने के साथ-साथ नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा करता है। इस समस्या पर चिंता जताते हुए शहर के बुद्धिजीवियों राजेश कुमार, हेमराज, गीता देवी, चंपा शर्मा, हर्ष कुमार, पुरुषोत्तम चंद और डीके वर्मा ने जिला प्रशासन और नगर निगम से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सायर और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान पूजन सामग्री, फूल-मालाएं और सजावटी सामान बेचने वाले विक्रेताओं का पंजीकरण किया जाए तथा उनके पास उपलब्ध सामग्री का भी आकलन रखा जाए। यदि पर्व के बाद सड़कों पर लावारिस सामग्री बिखरी मिलती है, तो संबंधित विक्रेताओं की पहचान कर उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस संबंध में नगर निगम अध्यक्ष सुमन ठाकुर ने कहा कि भविष्य में त्योहारी सीजन के दौरान विक्रेताओं को सख्त हिदायत दी जाएगी कि बचा हुआ सामान सड़कों पर न फेंकें और उसे अपने साथ वापस ले जाएं। इसके लिए विक्रेताओं के नाम, पते और फोन नंबर का पंजीकरण किया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति शहर में गंदगी फैलाता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।