{"_id":"696291b1ad20f9af500550bb","slug":"hrtcs-dilapidated-buses-are-inviting-accidents-in-jogindernagar-mandi-news-c-90-1-ssml1025-182185-2026-01-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: जोगिंद्रनगर में हादसों को न्योता दे रही एचआरटीसी की खटारा बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: जोगिंद्रनगर में हादसों को न्योता दे रही एचआरटीसी की खटारा बसें
Sat, 10 Jan 2026 11:21 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:21 PM IST
विज्ञापन
जोगिंद्रनगर बस अड्डा पर निजी बस में सफर करने के लिए उमड़ी यात्रियों की भीड़। फाइल फोटाे
- फोटो : शनिवार की सुबह निर्माणाधीन नालबंदान-रसूलपुर मार्ग पर लगा जाम। स्रोत: क्षेत्रीय नागरिक।
जोगिंद्रनगर (मंडी)। बीते कल सिरमौर जिले में हुए दर्दनाक बस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मगर जोगिंद्रनगर में अरसे से एचआरटीसी प्रबंधन अभी भी कुंभकरणी नींद सोया हुआ है। मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे और सरकाघाट सड़क पर शाम के समय माइलेज पूरी कर चुकीं ओवरलोड होकर चलती बसें सिरमौर जैसी किसी बड़ी त्रासदी को न्योता दे रही हैं।
जोगिंद्रनगर डिपो में अरसे से ओवरलोडिंग का सिलसिला जारी है। बसों की कमी के कारण शैक्षणिक संस्थानों के हजारों विद्यार्थियों को बसों के पायदानों पर लटककर सफर करना पड़ रहा है। संकरी सड़कों पर आरक्षित सीटों से दुगनी भीड़ बिठाकर यह बसें मौत का सफर तय कर रही हैं। सिरमौर हादसे का मुख्य कारण भी मानवीय भूल और तकनीकी खामियां बताई जा रही हैं, बावजूद इसके यहाँ यात्री भीड़ के आगे विवश हैं।
परिवहन निगम की बदहाली का आलम यह है कि जोगिंद्रनगर में करीब 80 बस रूटों को चलाने के लिए बेड़े में केवल 43 बसें ही मौजूद हैं। इनमें से आठ से 10 बसें अपनी माइलेज पूरी कर चुकी हैं। कार्यशाला में कलपुर्जों के अभाव के चलते मरम्मत कार्य अधूरा है, जिससे बीच सफर में बसों का हांफना और खराब होना आम बात हो गई है। यात्रियों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।
विज्ञापन
चालक-परिचालकों को बसों में ओवरलोडिंग न करने के निर्देश दिए हैं। कार्यशाला में संसाधनों के अभाव को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। -विनोद डोहरू, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी जोगिंद्रनगर
माइलेज पूरी कर चुकी बसों को बदला जा रहा है। बेड़े में नई बीएस-6 बसों को शामिल करने का सिलसिला जारी है, ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सके। -पंकज चड्ढा, डीएम, एचआरटीसी धर्मशाला डिविजन
विज्ञापन
जोगिंद्रनगर डिपो में अरसे से ओवरलोडिंग का सिलसिला जारी है। बसों की कमी के कारण शैक्षणिक संस्थानों के हजारों विद्यार्थियों को बसों के पायदानों पर लटककर सफर करना पड़ रहा है। संकरी सड़कों पर आरक्षित सीटों से दुगनी भीड़ बिठाकर यह बसें मौत का सफर तय कर रही हैं। सिरमौर हादसे का मुख्य कारण भी मानवीय भूल और तकनीकी खामियां बताई जा रही हैं, बावजूद इसके यहाँ यात्री भीड़ के आगे विवश हैं।
विज्ञापन
परिवहन निगम की बदहाली का आलम यह है कि जोगिंद्रनगर में करीब 80 बस रूटों को चलाने के लिए बेड़े में केवल 43 बसें ही मौजूद हैं। इनमें से आठ से 10 बसें अपनी माइलेज पूरी कर चुकी हैं। कार्यशाला में कलपुर्जों के अभाव के चलते मरम्मत कार्य अधूरा है, जिससे बीच सफर में बसों का हांफना और खराब होना आम बात हो गई है। यात्रियों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।
विज्ञापन
चालक-परिचालकों को बसों में ओवरलोडिंग न करने के निर्देश दिए हैं। कार्यशाला में संसाधनों के अभाव को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। -विनोद डोहरू, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी जोगिंद्रनगर
माइलेज पूरी कर चुकी बसों को बदला जा रहा है। बेड़े में नई बीएस-6 बसों को शामिल करने का सिलसिला जारी है, ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सके। -पंकज चड्ढा, डीएम, एचआरटीसी धर्मशाला डिविजन