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Mandi News: जंगलों में मटर बीजने पर दर्ज होगा आपराधिक केस

Mon, 29 Jul 2024 05:00 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 05:00 PM IST
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Criminal case will be registered for sowing peas in forests
डीएफओ नाचन ने पंचायतों से किया अतिक्रमण की सूचना देने का आग्रह
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वन विभाग के कर्मचारियों को भी दिए निगरानी रखने के सख्त निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। वन भूमि पर अतिक्रमण कर जंगलों में मटर की बिजाई करने पर अब आपराधिक केस दर्ज किया जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को वन भूमि की निगरानी करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। वन मंडलाधिकारी नाचन ने पंचायतों को भी अतिक्रमण की सूचना वन विभाग को देने का आग्रह किया है। वन विभाग ने ये निर्देश पिछले वर्षों में वन भूमि पर खरपतवार नाशक स्प्रे कर मटर बिजाई के मामले आने के बाद जारी किए हैं।
बीते वर्ष सिराज के कुछ वन क्षेत्रों में ऐसे मामले पकड़े थे और जंगलों में बीजे मटर की फसल को नष्ट किया था। सिराज के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ ग्रामीण जंगलों, सरकारी भूमि पर स्थित घासनियों, चरागाहों में मटर की अवैध खेती करने के लिए घास और उगे हुए खरपतवार को नष्ट करने के लिए कृषि विभाग और निजी विक्रय केंद्रों में मौजूद खरपतवार नाशक दवाई का उपयोग करते हैं। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया है, क्योंकि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण से खुले चरागाहों से पशुओं के लिए चारा नष्ट हो रहा था। इसी के साथ दवा और अवैध खेती पर रोक लगाने की मांग उठी थी।
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बता दें कि सिराज और गोहर क्षेत्र में आजकल मटर की बिजाई चल रही है। लोग अपने खेतों के अलावा साथ लगती घासनियों यहां तक की वन भूमि पर खरपतवार नाशक की स्प्रे कर मटर की बिजाई करते हैं। बरसात के मौसम में यह खरपतवार पानी के साथ घुलकर पेयजल स्रोतों में मिल जाता है। इसके अलावा केमिकल मिक्स मटर के बीज खाने से पशु-पक्षी भी मर जाते हैं। इस सब पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने यह कवायद छेड़ी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरपतवार दवा पतों के माध्यम से पौधों को नष्ट करने का कार्य करती है। स्प्रे उपरांत किसी भी खरपतवार का पौधा करीबन 15 से 20 दिन में जड़ से नष्ट हो जाता है।
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उधर, डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को मटर बिजाई के लिए वन भूमि को कब्जाने और घास को नष्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्थानीय पंचायतों का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर वन भूमि अतिक्रमण कर मटर बिजाई का मामला सामने आता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
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