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बाल स्कूल जोगिंद्रनगर : खिड़कियां टूटीं, जर्जर दीवारें
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जोगिंद्रनगर के बाल स्कूल के जर्जर भवन में बैठे विद्यार्थी।
- फोटो : Mandi
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। शहर के बाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के खस्ताहाल भवन में विद्यार्थी कक्षाएं लगाने को मजबूर हैं। 1928 में बने स्कूल भवन की मरम्मत न होने से हालत बेहद खस्ता है। आठ-दस कमरों में से दो पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिए गए हैं, अन्य कमरों की कहीं खिड़कियां टूटी हैं तो कहीं दीवारों में दरारें आ गई हैं। कभी भी हादसा हो सकता है। छतों से पानी टपकता है।
कोरोना काल में स्कूल खुल गए हैं। सामाजिक दूरी के लिए विद्यार्थियों को दूर-दूर बैठाया जा रहा है। इस कारण अधिक कमरों की जरूरत पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन को कोरोना नियमों को पूरा करने के लिए खस्ताहाल भवन के कमरों में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
इन कमरों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि ये कभी भी गिर सकते हैं। खिड़कियां-दरवाजे टूटे होने के कारण सर्दियों में विद्यार्थी ठंड से ठिठुरने को मजबूर हैं। यहां डेस्क भी नहीं हैं। फर्श पर बैठकर ही कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
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आठ दशक बीत जाने के बाद भी स्कूल भवन की मरम्मत के लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है। स्कूल की स्थापना वर्ष 1928 में हुई थी। 1935 में माध्यमिक और 1949 में उच्च पाठशाला का दर्जा मिला। इसके बाद 1986 में स्कूल को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का दर्जा मिला।
वर्तमान में 600 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल प्रधानाचार्य परस राम सैनी ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग से बजट की मांग की जा रही है। अभी भी कुछ औपचारिकताओं का पेच फंसा है। विधायक प्रकाश राणा का कहना है कि बाल पाठशाला के भवन की मरम्मत के लिए पत्राचार किया जाएगा। भवन की मरम्मत के लिए जल्द बजट का प्रावधान करवाया जाएगा।
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कोरोना काल में स्कूल खुल गए हैं। सामाजिक दूरी के लिए विद्यार्थियों को दूर-दूर बैठाया जा रहा है। इस कारण अधिक कमरों की जरूरत पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन को कोरोना नियमों को पूरा करने के लिए खस्ताहाल भवन के कमरों में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
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इन कमरों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि ये कभी भी गिर सकते हैं। खिड़कियां-दरवाजे टूटे होने के कारण सर्दियों में विद्यार्थी ठंड से ठिठुरने को मजबूर हैं। यहां डेस्क भी नहीं हैं। फर्श पर बैठकर ही कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
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आठ दशक बीत जाने के बाद भी स्कूल भवन की मरम्मत के लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है। स्कूल की स्थापना वर्ष 1928 में हुई थी। 1935 में माध्यमिक और 1949 में उच्च पाठशाला का दर्जा मिला। इसके बाद 1986 में स्कूल को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का दर्जा मिला।
वर्तमान में 600 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल प्रधानाचार्य परस राम सैनी ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग से बजट की मांग की जा रही है। अभी भी कुछ औपचारिकताओं का पेच फंसा है। विधायक प्रकाश राणा का कहना है कि बाल पाठशाला के भवन की मरम्मत के लिए पत्राचार किया जाएगा। भवन की मरम्मत के लिए जल्द बजट का प्रावधान करवाया जाएगा।
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