{"_id":"6a4aab3322d4c1a99f0b82ca","slug":"bhela-village-awaits-relief-life-being-spent-in-a-tin-shed-mandi-news-c-90-1-mnd1027-203600-2026-07-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: राहत की राह देखता भेला गांव, टिन शेड में बीत रही जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: राहत की राह देखता भेला गांव, टिन शेड में बीत रही जिंदगी
विज्ञापन
एक साल बाद भी मलबे में दबी उम्मीदें, राहत की किस्त जेब में, पर घर बनाने को जमीन नहीं
फिर सिर पर आई बरसात, बालीचौकी में दरकते पहाड़ों के बीच अपनों के आशियाने की तलाश
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। पिछली बरसात में आई भीषण आपदा को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन उपमंडल बालीचौकी की पंचायत देवधार के भेला गांव के आपदा प्रभावित परिवारों की बदहाली आज भी जस की तस बनी हुई है। बालीचौकी के अंतर्गत आने वाली देवधार पंचायत के भेला गांव में कुदरत के कहर से प्रभावित 18 से अधिक परिवार आज भी टिन शेड और लकड़ी के अस्थायी तंबुओं में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से राहत राशि की पहली किस्त तो मिल चुकी है, लेकिन सुरक्षित और समतल भूमि उपलब्ध न होने के कारण लोग अपने स्थायी आवास का निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
आपदा प्रभावित हरी राम ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि जीवनभर की जमा-पूंजी से बनाया गया घर एक ही झटके में जमींदोज हो गया। जिस स्थान पर उनका आशियाना था, वहां अब गहरी दरारें और भूधंसाव की स्थिति है, जिससे दोबारा निर्माण संभव नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि सर्दी और गर्मी जैसे-तैसे अस्थायी प्लास्टिक तंबुओं में काट ली, लेकिन अब मानसून की दस्तक ने एक बार फिर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बुजुर्ग महिला प्रमिला देवी ने भावुक होते हुए बताया कि पिछली बरसात में उन्हें खेतों में खुले आसमान के नीचे पानी के बीच रातें गुजारनी पड़ी थीं। अब टिन और लकड़ी से बने अस्थायी आश्रयों में भी बारिश का पानी टपकने लगा है, जिससे जीवन और कठिन हो गया है। स्थानीय निवासी विद्या देवी ने कहा कि बारिश का पानी घुस जाने से बच्चों की किताबें, कॉपियां और कपड़े तक खराब हो जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गीले और असुरक्षित माहौल में बच्चों को सुलाना भी बेहद मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पुनर्वास और वैकल्पिक भूमि की मांग को लेकर वे पटवारी से लेकर एसडीएम कार्यालय तक कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेने की अपील की है।
विज्ञापन
इस संबंध में एसडीएम बालीचौकी विचित्र सिंह ने कहा कि अभी तक ग्रामीणों की ओर से जमीन से संबंधित कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। यदि शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
फिर सिर पर आई बरसात, बालीचौकी में दरकते पहाड़ों के बीच अपनों के आशियाने की तलाश
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। पिछली बरसात में आई भीषण आपदा को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन उपमंडल बालीचौकी की पंचायत देवधार के भेला गांव के आपदा प्रभावित परिवारों की बदहाली आज भी जस की तस बनी हुई है। बालीचौकी के अंतर्गत आने वाली देवधार पंचायत के भेला गांव में कुदरत के कहर से प्रभावित 18 से अधिक परिवार आज भी टिन शेड और लकड़ी के अस्थायी तंबुओं में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से राहत राशि की पहली किस्त तो मिल चुकी है, लेकिन सुरक्षित और समतल भूमि उपलब्ध न होने के कारण लोग अपने स्थायी आवास का निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
आपदा प्रभावित हरी राम ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि जीवनभर की जमा-पूंजी से बनाया गया घर एक ही झटके में जमींदोज हो गया। जिस स्थान पर उनका आशियाना था, वहां अब गहरी दरारें और भूधंसाव की स्थिति है, जिससे दोबारा निर्माण संभव नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि सर्दी और गर्मी जैसे-तैसे अस्थायी प्लास्टिक तंबुओं में काट ली, लेकिन अब मानसून की दस्तक ने एक बार फिर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बुजुर्ग महिला प्रमिला देवी ने भावुक होते हुए बताया कि पिछली बरसात में उन्हें खेतों में खुले आसमान के नीचे पानी के बीच रातें गुजारनी पड़ी थीं। अब टिन और लकड़ी से बने अस्थायी आश्रयों में भी बारिश का पानी टपकने लगा है, जिससे जीवन और कठिन हो गया है। स्थानीय निवासी विद्या देवी ने कहा कि बारिश का पानी घुस जाने से बच्चों की किताबें, कॉपियां और कपड़े तक खराब हो जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गीले और असुरक्षित माहौल में बच्चों को सुलाना भी बेहद मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पुनर्वास और वैकल्पिक भूमि की मांग को लेकर वे पटवारी से लेकर एसडीएम कार्यालय तक कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेने की अपील की है।
विज्ञापन
इस संबंध में एसडीएम बालीचौकी विचित्र सिंह ने कहा कि अभी तक ग्रामीणों की ओर से जमीन से संबंधित कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। यदि शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।