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किराया वसूली में कोताही करने वालों पर गिरेगी गाज
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:22 PM IST
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गोहर (मंडी)। पंचायती राज विभाग समेत सरकारी तंत्र की अफसरशाही ने 1992 से पंचायतों की दुकानों का किराया वसूलने में गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाया है। यही वजह है कि गोहर बस स्टैंड के पास स्वरोजगार योजना के अंतर्गत बनाई गई दुकानों में सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठे कुछ कारोबारियों से किराया वसूला नहीं जा सका है।
पिछले कई वर्षों से पंचायत को किराया न देने से इन दुकानदारों के पास पंचायत की देनदारी 4 लाख 23 हजार 950 रुपये हो गई है। मामले से संबंधित एक शिकायत की जांच करते हुए एसडीएम गोहर को बीडीओ द्वारा सौँपी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके बाद पंचायत सचिव भागीरथ चौहान ने बताया कि किराया न देने वाले लोगों को पंचायत ने दोबारा नोटिस जारी कर दिए हैं। एसडीएम ने जिलाधीश को रिपोर्ट करते हुए संबंधित पंचायत के नुमाइंदों समेत विभागीय अफसरों पर नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है।
यह है मामला
गोहर के एक व्यक्ति ने एसडीएम राघव शर्मा को शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि गोहर बस स्टैंड में पंचायत की जेआरवाई के अंतर्गत बनीं दुकानों को किराये पर दिया गया है। लेकिन, ये दुकानदार कई वर्षों से पंचायत को किराया नहीं दे रहे हैं और जरूरतमंद लोग सड़कों पर अपना कारोबार करने पर मजबूत हैं। इस संबंध में एसडीएम ने बीडीओ गोहर को आदेश जारी कर जांच के आदेश दिए थे।
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यह है बीडीओ की रिपोर्ट में
बीडीओ ने एसडीएम गोहर को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि पंचायत गोहर ने वर्ष 1992 से 1994 में जेआरवाई के अंतर्गत 23 दुकानों का निर्माण किया था। बीडीओ रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दुकानों को पंचायत ने किराये पर दे दिया। बीडीओ ने रिपोर्ट में कहा है कि दो दुकानें मौके पर बंद पाई गईं, जिनसे 13 हजार 300 और 34 हजार 850 रुपये किराया वसूला जाना है। शेष 21 व्यक्तियों से 3 लाख 75 हजार 800 की बकाया राशि वसूली जानी है। एसडीएम को दी रिपोर्ट में बीडीओ ने कुल वसूली की रकम 23 लोगों से 4 लाख 23 हजार 950 रुपये बताई है।
वसूली के सार्थक प्रयास नहीं हुए
एसडीएम गोहर राघव शर्मा ने बताया कि जांच से स्पष्ट होता है कि ग्राम पंचायत ने बंद पड़ी दुकानों के नियमानुसार आवंटन एवं लंबित किराये की वसूली के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं किए। पंचायत और विभाग के संबंधित अधिकारी की लापरवाही से सरकार को राजस्व हानि हुई है। मामले की सूचना उपायुक्त को दी गई है। लापरवाह पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित सरकारी नुमाइंदों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
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पिछले कई वर्षों से पंचायत को किराया न देने से इन दुकानदारों के पास पंचायत की देनदारी 4 लाख 23 हजार 950 रुपये हो गई है। मामले से संबंधित एक शिकायत की जांच करते हुए एसडीएम गोहर को बीडीओ द्वारा सौँपी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके बाद पंचायत सचिव भागीरथ चौहान ने बताया कि किराया न देने वाले लोगों को पंचायत ने दोबारा नोटिस जारी कर दिए हैं। एसडीएम ने जिलाधीश को रिपोर्ट करते हुए संबंधित पंचायत के नुमाइंदों समेत विभागीय अफसरों पर नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है।
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यह है मामला
गोहर के एक व्यक्ति ने एसडीएम राघव शर्मा को शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि गोहर बस स्टैंड में पंचायत की जेआरवाई के अंतर्गत बनीं दुकानों को किराये पर दिया गया है। लेकिन, ये दुकानदार कई वर्षों से पंचायत को किराया नहीं दे रहे हैं और जरूरतमंद लोग सड़कों पर अपना कारोबार करने पर मजबूत हैं। इस संबंध में एसडीएम ने बीडीओ गोहर को आदेश जारी कर जांच के आदेश दिए थे।
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यह है बीडीओ की रिपोर्ट में
बीडीओ ने एसडीएम गोहर को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि पंचायत गोहर ने वर्ष 1992 से 1994 में जेआरवाई के अंतर्गत 23 दुकानों का निर्माण किया था। बीडीओ रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दुकानों को पंचायत ने किराये पर दे दिया। बीडीओ ने रिपोर्ट में कहा है कि दो दुकानें मौके पर बंद पाई गईं, जिनसे 13 हजार 300 और 34 हजार 850 रुपये किराया वसूला जाना है। शेष 21 व्यक्तियों से 3 लाख 75 हजार 800 की बकाया राशि वसूली जानी है। एसडीएम को दी रिपोर्ट में बीडीओ ने कुल वसूली की रकम 23 लोगों से 4 लाख 23 हजार 950 रुपये बताई है।
वसूली के सार्थक प्रयास नहीं हुए
एसडीएम गोहर राघव शर्मा ने बताया कि जांच से स्पष्ट होता है कि ग्राम पंचायत ने बंद पड़ी दुकानों के नियमानुसार आवंटन एवं लंबित किराये की वसूली के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं किए। पंचायत और विभाग के संबंधित अधिकारी की लापरवाही से सरकार को राजस्व हानि हुई है। मामले की सूचना उपायुक्त को दी गई है। लापरवाह पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित सरकारी नुमाइंदों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।