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17 साल से बिना उपयोग के ही रह गई दुकानें
Updated Mon, 04 Dec 2017 10:42 PM IST
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सरकाघाट (मंडी)। करीब 17 वर्ष पूर्व स्थानीय कारीगरों को उनके बनाए हुए उत्पाद बेचने के लिए कुछ दुकानों का निर्माण किया गया था। यहां पर धरातल और इसके ऊपर छह दुकानें बनाई जानी थी। धरातल पर तो दुकानें नहीं बन पाई लेकिन, इसके ऊपर दो दुकानें बनाई गई हैं। इन दुकानों का निर्माण सरकाघाट-धर्मपुर मार्ग पर वन विभाग के कार्यालय के निकट किया गया था। लेकिन, इतना समय बीत जाने के बाद भी यह दुकानें आज तक किसी भी कारीगर को नहीं दी गई। परिणामस्वरूप इन दुकानों पर हमेशा शटर लगा रहता है और यह किसी काम में प्रयोग नहीं हो रही हैं। विभाग की इस अनदेखी से किसी को कोई भी लाभ नहीं मिल रहा, बल्कि इन दुकानों की स्थिति भी खराब होने लगी है। इन दुकानों के निर्माण कार्य का शुभारंभ उस समय के क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के उद्योग मंत्री रंगीला राम ने किया था। इन दुकानों का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, बुनकरों जिनमें बांस से बर्तन बनाने वाले, लोहे के औजार आदि बनाने वाले और अन्य हस्तकला का सामान बनाने वाले लोगों के लिए किया गया था। लेकिन, आज तक किसी को भी इन दुकानों को नहीं दिया गया। आईआरडीपी परिवारों से संबंध रखने वाले कारीगरों रोशन लाल, विजय कुमार, बलदीप सिंह, रमेश चंद, प्रेम सिंह, हरी राम, दिला राम, भाग सिंह, भूरी सिंह, तोता राम, नानक चंद, कृष्ण चंद आदि ने विभाग से इन दुकानों को उनको देने की गुहार लगाई है, ताकि वे वहां अपनी रोजी-रोटी कमा सकें। विकास खंड अधिकारी गोपालपुर कुलवंत पठानिया ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पूर्व ही कार्यभार संभाला है। शीघ्र ही दुकानों के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।
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