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माता शिकारी देवी की तिजोरी तोड़ हजारों का चढ़ावा ले उड़े चोर
Updated Sat, 20 Jan 2018 11:05 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जंजैहली (मंडी)। जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ शिकारी देवी में पहली दफा चोरी का मामला सामने आया है। यहां पर शातिरों ने मंदिर की तिजोरी तोड़ कर हजारों की नकदी उड़ा ली है। मंदिर के सराय के गेट का ताला तोड़ने में असफल रहने पर शातिरों ने एक तरफ गेट को ही तोड़ दिया है। वहीं, सराय के अंदर अलमारियों के ताले तोड़ कर भी सामान बिखेर दिया है। मंदिर के पुजारी के अनुसार मंदिर की तिजोरी को अंतिम दफा दिसंबर के आस-पास प्रशासन की देखरेख में खोला गया था। हालांकि, इसके बाद भी मकर संक्रांति दिन भी मंदिर खुला था। पुजारी के अनुसार तिजारी से शातिरों ने हजारों की नकदी से हाथ साफ किए हैं। पुजारी सुरेश शर्मा ने तहसीलदार थुनाग शमशेर सिंह को घटना के बारे में सूचित कर दिया है। पुजारी सुरेश शर्मा ने कहा कि शुक्रवार को आईपीएच कर्मी ने उन्हें मंदिर की सराय के गेट से तोड़ फोड़ की सूचना मिली। जिसके बाद वह शनिवार को मंदिर में पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर की सरायं में ही तिजोरी को रखा गया था। यहां पर शातिरों ने सराय के मुख्य गेट को एक साइड से तोड़ दिया है। जबकि, अंदर रखी तिजोरी को भी तोड़ कर हजारों रुपए की नकदी उड़ा ली है। इसके अलावा कमरे में रखी सभी अलमारियों को भी तोड़ा गया है। पुजारी का दावा है कि मंदिर में पहली दफा चोरी हुिई है। उन्होंने प्रशासन से मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग उठाई है। इसके अलावा प्रशासन से मंदिर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग भी उठाई है।
इस सीजन में देरी से बंद हुआ मंदिर
जानकारी के अनुसार शिकारीदेवी मंदिर के कपाट बर्फबारी के दौरान 15 नवंबर के बाद से ही बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन, इस सीजन में अभी तक भारी बर्फबारी न होने के कारण मंदिर के कपाट दिसंबर तक खुले रहे। वहीं, 14 जनवरी मकर संक्रांति को भी मंदिर में पारंपरिक पूजन हुुआ और इस दिन भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शीश नवा कर आशीर्वाद ग्रहण किया था। बूढ़ा केदार में बर्फीले पानी में स्नान के बाद माता शिकारी के दर्शन करने सैकड़ों श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं।
माता शिकारी को चढ़ाई जाती है चांदी की आंखें
माता शिकारी देवी को चंादी की आंखें चढ़ाने की मान्यता है। कहा जाता है कि आंखों की हर समस्या से निदान पाने के लिए श्रद्धालु यहां पर चांदी की आंखें मां को चढ़ाते हैं। लेकिन, आज तक यहां पर कभी भी चोरी नहीं हुई। मंदिर के पुजारी के अनुसार पहली बार चोरी हुई है। जिससे यहां पर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ गए है।
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मामले की जांच जारी : तहसीलदार
तहसीलदार थुनाग शमशेर सिंह ने कहा कि पुजारी ने मंदिर में चोरी की सूचना दी है। इस बारे में पुलिस को सूचित किया जा रहा है। मंदिर की तिजोरी को एसडीएम जंजैहली की देखरेख में दिसंबर माह में खोला गया था। इसके बाद जितना चढ़ावा चढ़ा है। उसे शातिर उड़ा ले गए है। मामले की जांच की जा रही है।
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इस सीजन में देरी से बंद हुआ मंदिर
जानकारी के अनुसार शिकारीदेवी मंदिर के कपाट बर्फबारी के दौरान 15 नवंबर के बाद से ही बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन, इस सीजन में अभी तक भारी बर्फबारी न होने के कारण मंदिर के कपाट दिसंबर तक खुले रहे। वहीं, 14 जनवरी मकर संक्रांति को भी मंदिर में पारंपरिक पूजन हुुआ और इस दिन भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शीश नवा कर आशीर्वाद ग्रहण किया था। बूढ़ा केदार में बर्फीले पानी में स्नान के बाद माता शिकारी के दर्शन करने सैकड़ों श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं।
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माता शिकारी को चढ़ाई जाती है चांदी की आंखें
माता शिकारी देवी को चंादी की आंखें चढ़ाने की मान्यता है। कहा जाता है कि आंखों की हर समस्या से निदान पाने के लिए श्रद्धालु यहां पर चांदी की आंखें मां को चढ़ाते हैं। लेकिन, आज तक यहां पर कभी भी चोरी नहीं हुई। मंदिर के पुजारी के अनुसार पहली बार चोरी हुई है। जिससे यहां पर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ गए है।
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मामले की जांच जारी : तहसीलदार
तहसीलदार थुनाग शमशेर सिंह ने कहा कि पुजारी ने मंदिर में चोरी की सूचना दी है। इस बारे में पुलिस को सूचित किया जा रहा है। मंदिर की तिजोरी को एसडीएम जंजैहली की देखरेख में दिसंबर माह में खोला गया था। इसके बाद जितना चढ़ावा चढ़ा है। उसे शातिर उड़ा ले गए है। मामले की जांच की जा रही है।