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Kullu News: मौसम ने साफ कर दिए नाशपाती के पेड़
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खास खबर....
जिले के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल को पहुंचा भारी नुकसान
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेड़ों पर अच्छी दिख रही फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। मौसम में आए बदलाव से जिले के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। फ्लावरिंग के समय मौसम अनुकूल न रहने से करीब 75 फीसदी फसल बर्बाद हुई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल खूब नजर आ रही है। जिले में सेब के बाद नाशपाती भी बागवानों की आर्थिकी मजबूत करने का मुख्य साधन है। जिले में करीब हर बागवान के बगीचों में नाशपाती के पेड़ हैं।
जिले की खराहल घाटी के घराकड़, न्योली, त्रांबली, बराधा, थरमाण, सेउबाग और काईस सहित बंजार और पार्वती घाटी के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल बहुत कम है। घाटी के बागवान अमित कुमार, गोपाल महंत, कृष्ण लाल, ज्ञान ठाकुर और कर्म चंद ने कहा कि निचले इलाकों में नाशपाती के बगीचों में भरपूर फूल खिले थे। अब पेड़ खाली नजर आ रहे हैं। कुछ वर्षों से मौसम अनुकूल न रहने से निचले क्षेत्र में नाशपाती की सेटिंग बहुत कम हो रही है।
नाशपाती की फसल कम होने से बागवानों में चिंता है। अच्छी फसल नहीं होने से बागवानों की आर्थिकी पर भी असर पड़ेगा। सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के अध्यक्ष लाल चंद ठाकुर ने कहा कि निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल कम है। फ्लावरिंग के वक्त मौसम अनुकूल न रहने से यह स्थिति पैदा हुई है। ऊंचाई वाले इलाकों में नाशपाती की फसल अच्छी है।
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इन किस्मों का होता है उत्पादन
जिले मेंं नाशपाती की विभिन्न किस्में पैदा हो रही हैं। प्रमुख तौर पर बार्टलेट का उत्पादन जिले में होता है। इसका कारोबार लाखों में होता है। इसके अलावा रेड बार्टलेट, मैक्स रेड बार्टलेट, कनोल रेड, स्टार क्रिमसन और लेट वैरायटी बाबू गोशा पैदा होती है।
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जिले के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल को पहुंचा भारी नुकसान
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेड़ों पर अच्छी दिख रही फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। मौसम में आए बदलाव से जिले के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। फ्लावरिंग के समय मौसम अनुकूल न रहने से करीब 75 फीसदी फसल बर्बाद हुई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल खूब नजर आ रही है। जिले में सेब के बाद नाशपाती भी बागवानों की आर्थिकी मजबूत करने का मुख्य साधन है। जिले में करीब हर बागवान के बगीचों में नाशपाती के पेड़ हैं।
जिले की खराहल घाटी के घराकड़, न्योली, त्रांबली, बराधा, थरमाण, सेउबाग और काईस सहित बंजार और पार्वती घाटी के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल बहुत कम है। घाटी के बागवान अमित कुमार, गोपाल महंत, कृष्ण लाल, ज्ञान ठाकुर और कर्म चंद ने कहा कि निचले इलाकों में नाशपाती के बगीचों में भरपूर फूल खिले थे। अब पेड़ खाली नजर आ रहे हैं। कुछ वर्षों से मौसम अनुकूल न रहने से निचले क्षेत्र में नाशपाती की सेटिंग बहुत कम हो रही है।
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नाशपाती की फसल कम होने से बागवानों में चिंता है। अच्छी फसल नहीं होने से बागवानों की आर्थिकी पर भी असर पड़ेगा। सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के अध्यक्ष लाल चंद ठाकुर ने कहा कि निचले क्षेत्रों में नाशपाती की फसल कम है। फ्लावरिंग के वक्त मौसम अनुकूल न रहने से यह स्थिति पैदा हुई है। ऊंचाई वाले इलाकों में नाशपाती की फसल अच्छी है।
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इन किस्मों का होता है उत्पादन
जिले मेंं नाशपाती की विभिन्न किस्में पैदा हो रही हैं। प्रमुख तौर पर बार्टलेट का उत्पादन जिले में होता है। इसका कारोबार लाखों में होता है। इसके अलावा रेड बार्टलेट, मैक्स रेड बार्टलेट, कनोल रेड, स्टार क्रिमसन और लेट वैरायटी बाबू गोशा पैदा होती है।