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क्षमता को पहचानें और बनें काबिल : डॉ. शुब्रीत
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अपराजिता.....
शारीरिक के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी, नशा किसी समस्या का समाधान नहीं
लॉरेल पब्लिक स्कूल गांधीनगर में अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं को किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। छात्राएं अपनी क्षमताओं को पहचानें और मेहनत कर काबिल बनें। जीवन में हमेशा सही चीजों को चुने। यह आपका कॅरिअर बनाने का समय है, इस समय आप केवल पढ़ाई पर फोकस करें। यह बात वीरवार को नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र भुंतर की मनोवैज्ञानिक डॉ. शुब्रीत ने लॉरेल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांधीनगर (कुल्लू) में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि कही।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में छात्राओं को मासिक धर्म शुरू हो जाता है। इसमें शर्म बिल्कुल न महसूस करें। यह शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। महिलाओं को मासिक धर्म होना बेहद जरूरी है। अब समय भी बदल रहा है, पहले मासिक धर्म पर खुलकर बात नहीं होती थी। अब इस पर खुलकर बात होती है।
शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य भी बेहद जरूरी है। नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इसलिए शुरुआत में ही इससे दूर रहेंगे तो आपके नशे की चपेट में आने की संभावना कम है। मोबाइल की लत बच्चों में बढ़ती जा रही है। प्रधानाचार्य निशा बोध ने कहा कि छात्राओं को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए खूब मेहनत करनी चाहिए। महिला सशक्तीकरण के लिए अमर उजाला की ओर से सराहनीय मुहिम चलाई गई है। इस दौरान स्कूल के एमडी राकेश बोध, भानु प्रिया, महेंद्र शौंढा आदि मौजूद रहे।
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कई विषयों पर हम अपने परिजनों के साथ खुलकर बात नहीं कर पाते, वे हमें दाेस्तों और अध्यापकों के साथ साझा करनी चाहिए। अकेले रहने से हम तनाव में जा सकते हैं। यह महत्वपूर्ण जानकारी अपराजिता कार्यक्रम के माध्यम से मिली है।
-सृष्टि, जमा दो छात्रा
ड्रग्स की समस्या भी लगातार बढ़ रही है। हमें इससे दूर रहना चाहिए। इसके दुष्प्रभाव बेहद खतरनाक हैं। नशे की चपेट में आने वाले युवक का भुंतर स्थित नशा मुक्ति केंद्र एवं पुनर्वास केंद्र में उपचार किया जाता है।
-अदिति, जमा दो छात्रा
...
अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में अच्छा कदम है। महिलाओं के हक की बात होती है। छात्राएं आज के समय में छात्रों से पीछे नहीं हैं। छात्राओं ने हर क्षेत्र में अपने आपको साबित किया है।
-अक्षिता राय, जमा दो छात्रा
...
मोबाइल का हमें सीमित इस्तेमाल करना चाहिए। मोबाइल की अधिक लत से आपके व्यवहार में बदलाव आता है। खासकर स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ही अधिक ध्यान देना चाहिए।
-अनन्या, दसवीं छात्रा
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शारीरिक के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी, नशा किसी समस्या का समाधान नहीं
लॉरेल पब्लिक स्कूल गांधीनगर में अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं को किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। छात्राएं अपनी क्षमताओं को पहचानें और मेहनत कर काबिल बनें। जीवन में हमेशा सही चीजों को चुने। यह आपका कॅरिअर बनाने का समय है, इस समय आप केवल पढ़ाई पर फोकस करें। यह बात वीरवार को नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र भुंतर की मनोवैज्ञानिक डॉ. शुब्रीत ने लॉरेल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल गांधीनगर (कुल्लू) में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि कही।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में छात्राओं को मासिक धर्म शुरू हो जाता है। इसमें शर्म बिल्कुल न महसूस करें। यह शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। महिलाओं को मासिक धर्म होना बेहद जरूरी है। अब समय भी बदल रहा है, पहले मासिक धर्म पर खुलकर बात नहीं होती थी। अब इस पर खुलकर बात होती है।
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शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य भी बेहद जरूरी है। नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इसलिए शुरुआत में ही इससे दूर रहेंगे तो आपके नशे की चपेट में आने की संभावना कम है। मोबाइल की लत बच्चों में बढ़ती जा रही है। प्रधानाचार्य निशा बोध ने कहा कि छात्राओं को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए खूब मेहनत करनी चाहिए। महिला सशक्तीकरण के लिए अमर उजाला की ओर से सराहनीय मुहिम चलाई गई है। इस दौरान स्कूल के एमडी राकेश बोध, भानु प्रिया, महेंद्र शौंढा आदि मौजूद रहे।
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कई विषयों पर हम अपने परिजनों के साथ खुलकर बात नहीं कर पाते, वे हमें दाेस्तों और अध्यापकों के साथ साझा करनी चाहिए। अकेले रहने से हम तनाव में जा सकते हैं। यह महत्वपूर्ण जानकारी अपराजिता कार्यक्रम के माध्यम से मिली है।
-सृष्टि, जमा दो छात्रा
ड्रग्स की समस्या भी लगातार बढ़ रही है। हमें इससे दूर रहना चाहिए। इसके दुष्प्रभाव बेहद खतरनाक हैं। नशे की चपेट में आने वाले युवक का भुंतर स्थित नशा मुक्ति केंद्र एवं पुनर्वास केंद्र में उपचार किया जाता है।
-अदिति, जमा दो छात्रा
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अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में अच्छा कदम है। महिलाओं के हक की बात होती है। छात्राएं आज के समय में छात्रों से पीछे नहीं हैं। छात्राओं ने हर क्षेत्र में अपने आपको साबित किया है।
-अक्षिता राय, जमा दो छात्रा
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मोबाइल का हमें सीमित इस्तेमाल करना चाहिए। मोबाइल की अधिक लत से आपके व्यवहार में बदलाव आता है। खासकर स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ही अधिक ध्यान देना चाहिए।
-अनन्या, दसवीं छात्रा
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