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हड़ताल: चालक-परिचालकों को ठीक करनी पड़ रही बसें
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कुल्लू। पीसमील वर्करों की हड़ताल से एचआटीसी की परेशानियां लगातार बढ़ने लगी हैं। निगम के चालकों-परिचालकों को खुद ही बसों की मरम्मत करनी पड़ रही है। विभिन्न रूटों से लौटने के बाद चालक-परिचालक ही बसें धोने पर मजबूर हैं।
निगम के कुल्लू डिपो की वर्कशॉप में कार्यरत 38 वर्कर सात दिन से हड़ताल पर हैं। बसों का रखरखाव करना दिक्कत भरा हो गया है। कुल्लू में निगम के पास 237 बसें हैं। इनकी मरम्मत का जिम्मा अब कुछ ही रेगुलर कर्मचारियों पर है। वर्कशॉप में रोजाना नियमित जांच के लिए सात से दस बसें आ रही हैं। इनकी जांच करना कर्मचारियों के लिए संभव नहीं है। रूट प्रभावित न हो, इसके लिए अब चालकों-परिचालकों की सेवाएं भी बसों के रखरखाव में ली जा रही हैं।
नियमानुसार लंबे रूट से लौटने के बाद बसों की नियमित जांच अनिवार्य है। इसके चलते हर तीसरे दिन लंबे रूटों की बसों की जांच की जाती है। लोकल रूटों पर चलने वाली बसों की भी चार से सात दिन में जांच करनी होती है।
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हड़ताल के कारण वर्कशॉप में कर्मचारी न होने से बसों की नियमित जांच नहीं हो पा रही है। जो बसें जांच के लिए आ भी रहीं हैं, उनकी चालकों-परिचालकों को स्वयं मरम्मत करनी पड़ रही है। निगम के पास करीब 20 बसें रिजर्व हैं।
इनमें भी पांच बसों को रूटों पर दौड़ाना पड़ रहा है। टूल डाउन हड़ताल के चलते निगम की तीन बसों की ब्रेक डाउन हो गई है। उधर, निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक डीके नारंग ने कहा कि लंबे और लोकल रूटों पर अभी बसों का संचालन जारी है। वर्कशॉप में रेगुलर कर्मचारियों के साथ चालक-परिचालक भी बसों का मरम्मत कार्य देख रहे हैं।
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निगम के कुल्लू डिपो की वर्कशॉप में कार्यरत 38 वर्कर सात दिन से हड़ताल पर हैं। बसों का रखरखाव करना दिक्कत भरा हो गया है। कुल्लू में निगम के पास 237 बसें हैं। इनकी मरम्मत का जिम्मा अब कुछ ही रेगुलर कर्मचारियों पर है। वर्कशॉप में रोजाना नियमित जांच के लिए सात से दस बसें आ रही हैं। इनकी जांच करना कर्मचारियों के लिए संभव नहीं है। रूट प्रभावित न हो, इसके लिए अब चालकों-परिचालकों की सेवाएं भी बसों के रखरखाव में ली जा रही हैं।
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नियमानुसार लंबे रूट से लौटने के बाद बसों की नियमित जांच अनिवार्य है। इसके चलते हर तीसरे दिन लंबे रूटों की बसों की जांच की जाती है। लोकल रूटों पर चलने वाली बसों की भी चार से सात दिन में जांच करनी होती है।
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हड़ताल के कारण वर्कशॉप में कर्मचारी न होने से बसों की नियमित जांच नहीं हो पा रही है। जो बसें जांच के लिए आ भी रहीं हैं, उनकी चालकों-परिचालकों को स्वयं मरम्मत करनी पड़ रही है। निगम के पास करीब 20 बसें रिजर्व हैं।
इनमें भी पांच बसों को रूटों पर दौड़ाना पड़ रहा है। टूल डाउन हड़ताल के चलते निगम की तीन बसों की ब्रेक डाउन हो गई है। उधर, निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक डीके नारंग ने कहा कि लंबे और लोकल रूटों पर अभी बसों का संचालन जारी है। वर्कशॉप में रेगुलर कर्मचारियों के साथ चालक-परिचालक भी बसों का मरम्मत कार्य देख रहे हैं।