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Kangra News: खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण शुरू
Mon, 06 Apr 2026 11:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:37 PM IST
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हमीरपुर। जिले में पशुपालन विभाग ने खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से पशुओं को बचाने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। यह अभियान 16 मई तक चलाया जाएगा।
45 दिन में लगभग 75 हजार पशुओं के टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। चार महीने से अधिक उम्र के सभी पशुओं को मुफ्त टीका लगाया जा रहा है। पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुपालकों के पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं।
विभाग की ओर से हर वर्ष पशुओं को टीके लगाए जाते हैं। खुरपका-मुंहपका रोग एक अत्यधिक संक्रामक पशु रोग है। यह खुरों वाले पशुओं जैसे- गाय, भैंस, भेंड़, बकरी और सूअर में होता है। इससे पीड़ित पशुओं को तेज बुखार आता है। मुंह से लार बहती रहती है। मुंह और खुरों पर छाले और घाव बन जाते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर पशु की मौत हो जाती है।
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इस रोग से संक्रमित पशुओं के दूध उत्पादन में भी गिरावट आ जाती है। पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे इस अभियान का पूरा लाभ उठाएं। अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाएं।
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खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक है। सभी पशुपालक अपने पशुओं का समय पर टीका करवाएं।
-सतीश कपूर, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर
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45 दिन में लगभग 75 हजार पशुओं के टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। चार महीने से अधिक उम्र के सभी पशुओं को मुफ्त टीका लगाया जा रहा है। पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुपालकों के पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं।
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विभाग की ओर से हर वर्ष पशुओं को टीके लगाए जाते हैं। खुरपका-मुंहपका रोग एक अत्यधिक संक्रामक पशु रोग है। यह खुरों वाले पशुओं जैसे- गाय, भैंस, भेंड़, बकरी और सूअर में होता है। इससे पीड़ित पशुओं को तेज बुखार आता है। मुंह से लार बहती रहती है। मुंह और खुरों पर छाले और घाव बन जाते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर पशु की मौत हो जाती है।
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इस रोग से संक्रमित पशुओं के दूध उत्पादन में भी गिरावट आ जाती है। पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे इस अभियान का पूरा लाभ उठाएं। अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाएं।
खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक है। सभी पशुपालक अपने पशुओं का समय पर टीका करवाएं।
-सतीश कपूर, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर