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अध्यापकों को नियुक्ति तिथि से मिलें समान लाभ : प्रवीण
Tue, 01 Sep 2026 01:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 01 Sep 2026 01:27 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। न्यू मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन संघ के राष्ट्रीय संयोजक प्रवीण शर्मा ने प्रदेश सरकार से वर्ष 2008 के विज्ञापन के तहत नियुक्त सभी अध्यापकों को नियुक्ति तिथि से एक समान वित्तीय व सेवा लाभ प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को उच्च न्यायालय के आदेशों की अक्षरशः अनुपालना करते हुए सभी प्रभावित अध्यापकों के साथ न्याय करना चाहिए।
प्रवीण शर्मा ने आरोप लगाया कि जब सरकार ने 2008 की विवादित नियुक्तियों को नियुक्ति तिथि से नियमित मान लिया है, तो वित्तीय लाभ देने में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ अध्यापकों को करीब 20 लाख रुपये तक के लाभ दिए गए, जबकि अन्य को मात्र पांच लाख रुपये में निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। 17 वर्षों से संघर्ष कर रहे इन शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक ही थी, इसलिए लाभ की अवधि और राशि में अंतर करना पूरी तरह अनुचित है।
संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मामले में सीधा हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि अध्यापकों को बार-बार न्यायालय जाने के लिए मजबूर न किया जाए। नियमों के विपरीत जहां ट्रेजरी या अन्य माध्यमों से अधिक भुगतान हुआ है, उसकी निष्पक्ष जांच हो और जरूरत पड़ने पर रिकवरी की जाए।
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इस अवसर पर डॉ. अरुण दत्त, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एनडी बिंद्रा, डोरिस बिंद्रा, रतन चंद चंबा, धर्मेंद्र, रीता डोगरा कांगड़ा, शैलेंद्र सूद, निरुपमा मिश्रा और मीनाक्षी हांडा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी सभी प्रभावित अध्यापकों को समानता के आधार पर एकमुश्त राहत देने की पैरवी की।
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प्रवीण शर्मा ने आरोप लगाया कि जब सरकार ने 2008 की विवादित नियुक्तियों को नियुक्ति तिथि से नियमित मान लिया है, तो वित्तीय लाभ देने में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ अध्यापकों को करीब 20 लाख रुपये तक के लाभ दिए गए, जबकि अन्य को मात्र पांच लाख रुपये में निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। 17 वर्षों से संघर्ष कर रहे इन शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक ही थी, इसलिए लाभ की अवधि और राशि में अंतर करना पूरी तरह अनुचित है।
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संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मामले में सीधा हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि अध्यापकों को बार-बार न्यायालय जाने के लिए मजबूर न किया जाए। नियमों के विपरीत जहां ट्रेजरी या अन्य माध्यमों से अधिक भुगतान हुआ है, उसकी निष्पक्ष जांच हो और जरूरत पड़ने पर रिकवरी की जाए।
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इस अवसर पर डॉ. अरुण दत्त, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एनडी बिंद्रा, डोरिस बिंद्रा, रतन चंद चंबा, धर्मेंद्र, रीता डोगरा कांगड़ा, शैलेंद्र सूद, निरुपमा मिश्रा और मीनाक्षी हांडा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी सभी प्रभावित अध्यापकों को समानता के आधार पर एकमुश्त राहत देने की पैरवी की।