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Kangra News: सॉफ्टवेयर सिस्टम स्थापित न करने पर ब्याज सहित लौटानी होगी एंडवास राशि
Thu, 17 Jul 2025 01:12 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 17 Jul 2025 01:12 AM IST
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धर्मशाला। सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर स्थापित करने के लिए एडवांस लेने के बाद इसे स्थापित न करने पर कंपनी को आठ लाख रुपये की एडवांस राशि छह फीसदी ब्याज सहित लौटानी होगी। साथ ही 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकद्दमा फीस भी देनी होगी। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
आयोग के समक्ष नॉर्थ इंडिया डिस्टिलर्स एंड बॉटलर्स कंपनी की ओर से साहिब सिंह ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने कहा था कि उनकी कंपनी हिमाचल एक पंजीकृत साझेदारी फर्म है, जो आबकारी नियमों के अनुसार शराब का निर्माण, विपणन और वितरण करती है। हाल ही में हिमाचल सरकार ने सभी डिस्टिलर्स और बॉटलर्स के विनिर्माण में लगी सभी इकाइयों में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। इसलिए फर्म ने इस प्रणाली को स्थापित करने के लिए सुंदरम टेक्नोलॉजीज महाराष्ट्र कंपनी से संपर्क किया और 45,08,662 रुपये में इसे स्थापित करने के लिए सहमति बनी।
कंपनी की ओर से एडवांस राशि के रूप में आठ लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से 27 जून 2022 को जमा करवाए। एडवांस राशि जमा करवाने के बाद महाराष्ट्र की कंपनी को 30 दिन के भीतर यह सिस्टम स्थापित करना था, लेकिन वह विफल रही। इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से नवंबर 2022 में विपक्षी पक्ष से एडवांस राशि वापस करने का आग्रह किया, लेकिन उसने मना कर दिया। उपभोक्ता आयोग के समक्ष पहुंची शिकायत पर सभी तथ्यों को जांचने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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आयोग के समक्ष नॉर्थ इंडिया डिस्टिलर्स एंड बॉटलर्स कंपनी की ओर से साहिब सिंह ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने कहा था कि उनकी कंपनी हिमाचल एक पंजीकृत साझेदारी फर्म है, जो आबकारी नियमों के अनुसार शराब का निर्माण, विपणन और वितरण करती है। हाल ही में हिमाचल सरकार ने सभी डिस्टिलर्स और बॉटलर्स के विनिर्माण में लगी सभी इकाइयों में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। इसलिए फर्म ने इस प्रणाली को स्थापित करने के लिए सुंदरम टेक्नोलॉजीज महाराष्ट्र कंपनी से संपर्क किया और 45,08,662 रुपये में इसे स्थापित करने के लिए सहमति बनी।
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कंपनी की ओर से एडवांस राशि के रूप में आठ लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से 27 जून 2022 को जमा करवाए। एडवांस राशि जमा करवाने के बाद महाराष्ट्र की कंपनी को 30 दिन के भीतर यह सिस्टम स्थापित करना था, लेकिन वह विफल रही। इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से नवंबर 2022 में विपक्षी पक्ष से एडवांस राशि वापस करने का आग्रह किया, लेकिन उसने मना कर दिया। उपभोक्ता आयोग के समक्ष पहुंची शिकायत पर सभी तथ्यों को जांचने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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