हिमाचल: 84 कनाल सरकारी भूमि कर दी निजी लोगों के नाम, अब 42 खरीदार विजिलेंस के रडार पर; जानें पूरा मामला
धर्मशाला के घनियारा में इंतकाल के जरिए करीब 84 कनाल सरकारी जमीन निजी नामों पर दर्ज कर आगे बेचने के मामले में विजिलेंस ने 42 खरीदारों और लाभार्थियों को नामजद किया है। जांच में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिला मुख्यालय के समीपवर्ती मौजा घनियारा में इंतकाल के सहारे करीब 84 कनाल सरकारी भूमि को निजी नामों पर दर्ज कर बेचने के बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। कानून के प्रावधानों को दरकिनार कर पहले सरकारी जमीन पर निजी हक जताया गया और फिर सुनियोजित तरीके से उसके टुकड़े कर आगे बेच दिए गए। धर्मशाला और पालमपुर में सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेक राम के मामले में विजिलेंस की ओर से दर्ज की गई दूसरी एफआईआर में अब 42 खरीदारों और लाभार्थियों को नामजद किया गया है।
ये सभी लोग अब विजिलेंस के रडार पर हैं। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच रिपोर्ट के अनुसार प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का पाया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार महाल चकबन घनियारा, महाल मोहली लाहड़ा दी और महाल ठेहड़ में इस खेल को अंजाम दिया गया। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा महाल चकबन घनियारा का है, जहां अलग-अलग इंतकालों के माध्यम से कुल 3-24-06 हेक्टेयर यानी करीब 84 कनाल सरकारी भूमि का गैरकानूनी हस्तांतरण हुआ।
दस्तावेजों के मुताबिक, 16 मई 2019 को इंतकाल संख्या 117 और 118 के जरिये सरकारी जमीन कई लोगों के नाम चढ़ाई गई। इसके ठीक बाद 25 मई 2019 को इंतकाल संख्या 120 के तहत 1-45-45 हेक्टेयर जमीन चार व्यक्तियों के नाम दर्ज की गई। इसे बाद में अन्य खरीदारों को बेच दिया गया। इसी क्षेत्र में इंतकाल संख्या 128 के जरिए भी 0-81-69 हेक्टेयर सरकारी जमीन निजी नामों पर दर्ज कर उसके हिस्से बेचने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा महाल मोहली लाहड़ा दी में 0-12-32 हेक्टेयर (3 कनाल) और महाल ठेहड़ में 0-03-29 हेक्टेयर (17 मरले) सरकारी भूमि के हस्तांतरण का मामला भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट में कुल 29 प्रारंभिक लाभार्थियों और 13 बाद के खरीदारों को चिह्नित किया गया है। जांच में धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराध बनने की पुष्टि की गई है।
मामले में यदि किसी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता साबित होती है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत अनुमति लेकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विजिलेंस अब भूमि रिकॉर्ड, इंतकाल और खरीद-फरोख्त से जुड़े वित्तीय साक्ष्यों की कड़ाई से पड़ताल कर रही है। नेक राम की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में जुड़े आरोपियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
यह है मामला
विजिलेंस के पास 10 फरवरी 2025 को शिकायत दर्ज हुई थी। बाद में इसे नियमित सत्यापन के लिए परिवर्तित किया गया। विजिलेंस मुख्यालय शिमला से 15 जुलाई 2025 को जारी पत्र के माध्यम से शिकायत को नियमित सत्यापन के लिए भेजा गया। इसके बाद 17 जुलाई 2025 को एसपी विजिलेंस धर्मशाला के कार्यालय के जरिये यह मामला संबंधित जांच प्रक्रिया में शामिल हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रक्कड़ निवासी नेक राम ने धर्मशाला तहसील के आसपास बड़े भू-भाग की जमीन खरीदी अथवा अर्जित की है। आरोप था कि सरकारी जमीन को उसकी पत्नी और मां के नाम स्थानांतरित करवाया गया। इसमें जनवरी 2026 को एफआआईआर दर्ज करने के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए विजिलेंस ृने सरकारी भूमि को स्थानांतरित करवाने के मामले में नेक राम के परिवार सहित 42 लोगों को नामजद किया है।