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Himachal News: सनी और आयुष बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, शहीद की बेटी आभा ने भी चमकाया प्रदेश का नाम
Mon, 09 Mar 2026 03:04 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, लंबागांव/खैरा (कांगड़ा)।
संवाद न्यूज एजेंसी, लंबागांव/खैरा (कांगड़ा)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 09 Mar 2026 03:04 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के दो युवा सनी ठाकुर और आयुष मेहरा ने प्रदेश का नाम चमकाया है। दोनों ने कड़े प्रशिक्षण के बाद सेना में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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सनी ठाकुर/आयुष मेहरा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
कांगड़ा के दो युवाओं ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले का मान बढ़ाया है। जयसिंहपुर के सनी ठाकुर और पालमपुर (खैरा) के आयुष मेहरा ने कड़े प्रशिक्षण के बाद सेना में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की हैं। जयसिंहपुर के सनी ठाकुर ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) गया से एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स में लेफ्टिनेंट नियुक्त हुए हैं।
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सनी ने टेक्निकल एंट्री में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सनी ने केंद्रीय विद्यालय हमीरपुर से स्कूली शिक्षा और जेएन राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सुंदरनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। उनके पिता मनजीत ठाकुर आईटीबीपी में सब इंस्पेक्टर हैं और माता मधुबाला गृहिणी हैं। दोनों जांबाजों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है। इन दोनों युवाओं की उपलब्धि से जिले भर में खुशी का माहौल है।
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इंजीनियरिंग छोड़ सेना में आए आयुष
पालमपुर के खैरा गांव के आयुष मेहरा ने सीडीएस (सीडीएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में प्रवेश पाया। दिवंगत सुनील कुमार के पुत्र आयुष ने दो साल तक निजी क्षेत्र में नौकरी की है। नौकरी करने के बाद देश सेवा के जुनून के चलते उन्होंने सेना का रुख किया। वह एनआईटी हमीरपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं।
पन्याली गांव के सौरभ बने लेफ्टिनेंट
झंडूता क्षेत्र के पन्याली गांव के सौरभ सिंह का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी की लहर है। मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित चयन प्रक्रिया में करीब 170 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। इनमें से पांच दिन की एसएसबी प्रक्रिया और चार दिन के कड़े मेडिकल परीक्षण के बाद सौरभ सिंह का चयन हुआ। सौरभ सिंह ने डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी से एग्रो फॉरेस्ट्री में एमएससी की डिग्री प्राप्त की है। वह बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। सौरभ और उनकी बहन दोनों ने 10वीं और 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बोर्ड से दो-दो लैपटॉप भी प्राप्त किए थे। सौरभ के पिता सुरेश पन्याली और माता सुदेश कुमारी शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। सौरभ एक अप्रैल को चेन्नई में अपनी रिपोर्ट करेंगे।
पालमपुर के खैरा गांव के आयुष मेहरा ने सीडीएस (सीडीएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में प्रवेश पाया। दिवंगत सुनील कुमार के पुत्र आयुष ने दो साल तक निजी क्षेत्र में नौकरी की है। नौकरी करने के बाद देश सेवा के जुनून के चलते उन्होंने सेना का रुख किया। वह एनआईटी हमीरपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं।
पन्याली गांव के सौरभ बने लेफ्टिनेंट
झंडूता क्षेत्र के पन्याली गांव के सौरभ सिंह का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी की लहर है। मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित चयन प्रक्रिया में करीब 170 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। इनमें से पांच दिन की एसएसबी प्रक्रिया और चार दिन के कड़े मेडिकल परीक्षण के बाद सौरभ सिंह का चयन हुआ। सौरभ सिंह ने डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी से एग्रो फॉरेस्ट्री में एमएससी की डिग्री प्राप्त की है। वह बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। सौरभ और उनकी बहन दोनों ने 10वीं और 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बोर्ड से दो-दो लैपटॉप भी प्राप्त किए थे। सौरभ के पिता सुरेश पन्याली और माता सुदेश कुमारी शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। सौरभ एक अप्रैल को चेन्नई में अपनी रिपोर्ट करेंगे।
शहीद की बेटी बनी सेना में लेफ्टिनेंट
कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र के कंडबाड़ी गांव की रहने वाली आभा ने अपने शहीद पिता के सपने को साकार करते हुए भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है। आभा के पिता ने वर्ष 2003 में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था और अब उनकी बेटी उसी राह पर चलकर सेना की वर्दी तक पहुंची है।
कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र के कंडबाड़ी गांव की रहने वाली आभा ने अपने शहीद पिता के सपने को साकार करते हुए भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है। आभा के पिता ने वर्ष 2003 में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था और अब उनकी बेटी उसी राह पर चलकर सेना की वर्दी तक पहुंची है।