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Kangra News: सुरक्षित रही दिवाली, कम चले पटाखे, हादसे भी घटे
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धर्मशाला। दिवाली पर्व पर पहली बार ऐसा हुआ है कि पटाखों से झुलसने का कोई मामला अस्पतालों तक नहीं पहुंचा है। कुछेक जगहों पर पटाखों के झुलसने के हल्के-फुल्के मामले सामने आए भी, लेकिन कोई भी उपचार के लिए अस्पताल तक नहीं पहुंचा है। दिवाली को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां आदि उपलब्ध करवाई गईं थीं।
वहीं, अग्निशमन विभाग की ओर से भी कर्मचारी दिवाली को लेकर पूरी तरह के तैनात किए गए थे। हर वर्ष दिवाली पर कई मामले पटाखों से झुलसने के अस्पतालों में सामने आते थे, लेकिन इस बार अभी तक कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि अब लोग पटाखे जलाते समय पूरी सावधानी बरत रहे हैं। उधर, जोनल अस्पताल धर्मशाला के एमएस डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि दिवाली के दौरान पटाखों से जलने का कोई बड़ा मामला अस्पताल में नहीं आया है। वहीं, टांडा मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. मोहन लाल ने बताया कि को बड़ा मामला सामने नहीं आया है। सोमवार को छुट्टी होने के कारण बर्न यूनिट बंद था, हो सकता है कि मंगलवार को कोई पटाखों से झुलसने वाला व्यक्ति उपचार के लिए आ सकता है।
निर्देश और जागरूकता रहे पटाखे कम चलाने और हादसे घटने के कारण
लगभग सभी सरकारी अस्पतालों में पहले से ही स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। सामाजिक संगठनों और सरकार और प्रशासन के स्तर पर चलाए गए अभियान ने भी पटाखों के कम इस्तेमाल और इससे सावधानियों को लेकर एडवायजरी जारी की थीं। वहीं, पटाखे चलाने का समय निर्धारण करना और ग्रीन पटाखों के निर्देशों के चलते भी लोगों ने पटाखे चलाने के प्रचलन को पिछले साल के मुकाबले कम किया है। वहीं, इस दिवाली सड़क पर घूमने वाले जानवरों के घायल होने की घटनाएं भी कम हुई हैं।
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वहीं, अग्निशमन विभाग की ओर से भी कर्मचारी दिवाली को लेकर पूरी तरह के तैनात किए गए थे। हर वर्ष दिवाली पर कई मामले पटाखों से झुलसने के अस्पतालों में सामने आते थे, लेकिन इस बार अभी तक कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि अब लोग पटाखे जलाते समय पूरी सावधानी बरत रहे हैं। उधर, जोनल अस्पताल धर्मशाला के एमएस डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि दिवाली के दौरान पटाखों से जलने का कोई बड़ा मामला अस्पताल में नहीं आया है। वहीं, टांडा मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. मोहन लाल ने बताया कि को बड़ा मामला सामने नहीं आया है। सोमवार को छुट्टी होने के कारण बर्न यूनिट बंद था, हो सकता है कि मंगलवार को कोई पटाखों से झुलसने वाला व्यक्ति उपचार के लिए आ सकता है।
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निर्देश और जागरूकता रहे पटाखे कम चलाने और हादसे घटने के कारण
लगभग सभी सरकारी अस्पतालों में पहले से ही स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। सामाजिक संगठनों और सरकार और प्रशासन के स्तर पर चलाए गए अभियान ने भी पटाखों के कम इस्तेमाल और इससे सावधानियों को लेकर एडवायजरी जारी की थीं। वहीं, पटाखे चलाने का समय निर्धारण करना और ग्रीन पटाखों के निर्देशों के चलते भी लोगों ने पटाखे चलाने के प्रचलन को पिछले साल के मुकाबले कम किया है। वहीं, इस दिवाली सड़क पर घूमने वाले जानवरों के घायल होने की घटनाएं भी कम हुई हैं।
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