प्लास्टर लगाने के बाद टांग हो गई खराब, डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाज में कोताही बरतने पर नागरिक अस्पताल नूरपुर के एक चिकित्सक के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। कोटला क्षेत्र के न्यांगल गांव के सुल्तान मोहम्मद पुत्र साहब दीन ने पुलिस थाना नूरपुर में नूरपुर अस्पताल के डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसका बेटा समीर खान आठवीं का छात्र है।
उसके पैर में दर्द हुआ तो वह इलाज के लिए उसे नूरपुर अस्पताल ले गया। चिकित्सक ने उसके पांव की जांच के बाद एक्स-रे करवाने को कहा। एक्स-रे रिपोर्ट चेक करने के बाद डॉक्टर ने कहा कि पैर की हड्डी टूटी हुई है, इसलिए इसे प्लास्टर लगवाना पड़ेगा। तब डॉक्टर ने पैर सहित उसकी टांग में भी प्लास्टर लगवा दिया और वह लड़के को घर ले आए। घर में कुछ दिन बाद जब लड़के की टांग में असहनीय दर्द होने लगा और टांग से रेशा निकलने लगा, तो वह अपने लड़के को नूरपुर अस्पताल में उसी डॉक्टर के पास ले गया।
डॉक्टर ने चेकअप किया और उसे बाहर से दवाई लाने को कहा। मात्र पांच मिनट में जब वह दवाई लेकर वापस पहुंचा, तो डॉक्टर का कमरा बंद था। तब अन्य डॉक्टरों से बात की तो उन्होंने बच्चे की टांग से रेशा निकलते देख कहा कि प्लास्टर काटना होगा। तब सुल्तान ने कहा कि आप प्लास्टर काट दो, लेकिन अन्य डॉक्टरों ने कहा कि जिस डॉक्टर ने प्लास्टर लगाया है वही इसे काटेगा। उसके बाद डॉक्टर से कई बार फोन किए, लेकिन उसने कोई भी फोन नहीं उठाया।
तब अन्य डॉक्टरों ने उसके बेटे को नूरपुर अस्पताल में दाखिल कर लिया और एक घंटे बाद ही उसे डिस्चार्ज कर टांडा अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। टांडा में डॉक्टरों ने प्लास्टर काट दिया। उसके बाद टांग की सफाई की। टांडा में तैनात डॉक्टरों ने कहा कि लड़के की टांग में रेशा पड़ चुका है, अगर यह रेशा ऐसे ही निकलता रहा तो टांग भी काटनी पड़ सकती है। साथ ही टांडा अस्पताल प्रबंधन ने भी डिस्चार्ज कर उसकी देखभाल घर पर ही करने की सलाह दी है। पीड़ित पिता ने कहा कि उसका बेटा चल नहीं पा रहा है।
उसने नूरपुर अस्पताल में सेवारत डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उधर, एसपी संतोष पटियाल ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। टांडा मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
उधर, सीएमओ डा. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि अभी तक उनके ध्यान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है।
कब क्या हुआ
पीड़ित बच्चे के पिता के मुताबिक 15 मई को प्लास्टर चढ़ाया गया। जब दर्द सहन नहीं हुआ तो 27 मई को बच्चे को लेकर नूरपुर अस्पताल पहुंचे, जहां संबंधित डॉक्टर गायब हो गया। इसके बाद 11 जून को टांडा से बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद पुलिस में केस दर्ज करवाया गया।