Health: हिमाचल के अस्पतालों में एलिसा तकनीक से रक्त की जांच के निर्देश, छोटे ब्लड बैंक को आ सकती हैं दिक्कतें
हिमाचल प्रदेश में सभी अस्पतालों के ब्लड बैंक को दान किए रक्त की जांच एलिसा तकनीक से करने के निर्देश दिए गए हैं। एलिसा तकनीक से सटीक परिणाम मिलते हैं, लेकिन इससे जुड़ी कुछ व्यावहारिक समस्याएं हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी ने सभी अस्पतालों के ब्लड बैंक को दान किए रक्त की जांच एलिसा तकनीक से करने के निर्देश दिए हैं। शिमला के बड़े अस्पतालों में एलिसा टेस्ट के लिए मशीनें और सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों में इस तकनीक का उपयोग करने में मुश्किलें पेश आ सकती हैं।
एलिसा यानी एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेंट ऐसे (एलिसा) एक जैव-रासायनिक जांच प्रक्रिया है। इसका उपयोग रक्त जैसे नमूनों में प्रोटीन, एंटीबॉडी और हार्मोन जैसे पदार्थों का पता लगाने और उनकी मात्रा निर्धारित करने के लिए किया जाता है। यह एंटीबॉडी और एक जुड़े हुए एंजाइम का उपयोग करके पता लगाने योग्य तब संकेत उत्पन्न करता है, जब नमूने में कोई विशिष्ट एंटीजन मौजूद होता है।
शिमला के आईजीएमसी, दीन दयाल उपाध्याय और कमला नेहरू अस्पतालों में एलिसा टेस्ट की सुविधा है। अन्य जिला और प्रदेश के छोटे अस्पतालों में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सी, मलेरिया और सिफलिस जैसे संक्रमणों की जांच के लिए अब भी रैपिड टेस्ट का उपयोग किया जाता है, ताकि जल्द परिणाम मिल सकें।
आईजीएमसी और केएनएच के ब्लड बैंक में एलिसा टेस्ट किए जाते हैं। दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भी यह सुविधा है। रक्तदान शिविरों से एकत्र किए गए रक्त की जांच इसी तकनीक से की जाती है। एलिसा टेस्ट से रक्त जांच के सटीक परिणाम मिलते हैं। -डॉ. राहुल राव, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी