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Himachal High Court: शास्त्री अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने दी बीएड शर्त से छूट; जानें विस्तार से
Sun, 27 Jul 2025 09:42 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 27 Jul 2025 09:42 AM IST
सार
टीजीटी संस्कृत की भर्ती 19 फरवरी 2025 से पहले के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही जारी रखने के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं। इसी के साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित एनसीटीई को नोटिस जारी किए हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टीजीटी संस्कृत (शास्त्री) की भर्ती 19 फरवरी 2025 से पहले के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही जारी रखने के लिए आदेश दिए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को चार हफ्ते में जवाब दायर करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने टीजीटी संस्कृत बनने के लिए बीएड अनिवार्य कर दी है। सरकार ने इसे लेकर भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव कर 19 फरवरी 2025 को एक अधिसूचना जारी की है। इसी के खिलाफ हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
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संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ की ओर से हिमाचल हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2023 में शास्त्री पदों की योग्यता को लेकर भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में जो बदलाव किए गए हैं, वे गलत हैं। अधिसूचना में शास्त्री करने वालों के लिए बीएड जरूरी कर दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने 2023 से पहले शास्त्री की है। याचिका में बताया गया है कि योग्यता मापदंड में जो बदलाव किए गए, वे बिना किसी सर्च कमेटी की जांच पड़ताल के किए गए हैं। लिहाजा, टीजीटी संस्कृत शास्त्री की भर्ती 19 फरवरी से पहले के नियमों पर ही जारी रखी जाए।
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आईटीबीपी की कांस्टेबल भर्ती में मेडिकल बोर्ड का फैसला अंतिमसंवाद न्यूज एजेंसी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) में कांस्टेबल मोटर मेकेनिक के पद पर भर्ती से संबंधित एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बलों में उच्च चिकित्सा मानक आवश्यक हैं। चिकित्सा बोर्ड के निर्णय में असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि मेडिकल बोर्ड का निर्णय अंतिम होता है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न तो विज्ञापन के उस प्रावधान को चुनौती दी, जो चिकित्सा बोर्ड के निर्णय को अंतिम मानती है और न ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के दिशा-निर्देश को चुनौती दी है, जो इस क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं।
अदालत ने कहा कि अर्धसैनिक बलों में उच्चतम चिकित्सा फिटनेस मानकों की आवश्यकता होती है, जिसमें समझौता नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता की 12 जून 2024 को हुई विस्तृत चिकित्सा जांच में आंखों की रोशनी तय मापदंडों के तहत नहीं पाई गई। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि तीन सरकारी अस्पतालों में अपनी आंखों की जांच कराई, जहां उनकी दृष्टि दोनों आंखों में समान पाई गई। इसके आधार पर उन्होंने आईटीबीपी की महानिदेशक से पुनः परीक्षा का अनुरोध किया। हालांकि उन्हें अनुपयुक्त दिखाया गया।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) में कांस्टेबल मोटर मेकेनिक के पद पर भर्ती से संबंधित एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बलों में उच्च चिकित्सा मानक आवश्यक हैं। चिकित्सा बोर्ड के निर्णय में असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि मेडिकल बोर्ड का निर्णय अंतिम होता है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न तो विज्ञापन के उस प्रावधान को चुनौती दी, जो चिकित्सा बोर्ड के निर्णय को अंतिम मानती है और न ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के दिशा-निर्देश को चुनौती दी है, जो इस क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं।
अदालत ने कहा कि अर्धसैनिक बलों में उच्चतम चिकित्सा फिटनेस मानकों की आवश्यकता होती है, जिसमें समझौता नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता की 12 जून 2024 को हुई विस्तृत चिकित्सा जांच में आंखों की रोशनी तय मापदंडों के तहत नहीं पाई गई। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि तीन सरकारी अस्पतालों में अपनी आंखों की जांच कराई, जहां उनकी दृष्टि दोनों आंखों में समान पाई गई। इसके आधार पर उन्होंने आईटीबीपी की महानिदेशक से पुनः परीक्षा का अनुरोध किया। हालांकि उन्हें अनुपयुक्त दिखाया गया।