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Hamirpur (Himachal) News: खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण शुरू
Sun, 12 Oct 2025 12:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:50 AM IST
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हमीरपुर। पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने जिलेभर में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है। पांच नवंबर तक बड़े पशुओं गाय-भैंस को टीके लगाए जाएंगे।
पशुपालन विभाग को करीब 75 हजार टीके मिले हैं। विभाग ने इन्हें पशु अस्पतालों में भेज दिया है। पशुपालन विभाग की ओर से ओर हर साल पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाता है। छोटे पशुओं भेड़-बकरियों के लिए बड़े पशुओं गाय-भैंस को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाता है।
गोशालाओं और पालतू पशुओं को टीके लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फिलहाल गाय-भैंस को टीके लगाए जा रहे हैं। इसके बाद भेड़-बकरियों का भी टीकाकरण प्रस्तावित है। पशुपालन विभाग ने लोगों से अपने पशुओं का टीकाकरण करवाने की अपील की है।
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खुरपका-मुंहपका एक संक्रामक रोग है, जो विषाणु से फैलता है। यह बीमारी गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर आदि को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, मुंह से लार टपकना, मुंह और पैरों में छाले शामिल हैं।
इस रोग से बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। अगर गाय-भैंस एफएमडी बीमारी से पीड़ित होती है, तो दूध उत्पादन में भी कमी आती है। इससे मादा पशुओं का गर्भपात भी हो सकता है। संवाद
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पशुपालन विभाग को करीब 75 हजार टीके मिले हैं। विभाग ने इन्हें पशु अस्पतालों में भेज दिया है। पशुपालन विभाग की ओर से ओर हर साल पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाता है। छोटे पशुओं भेड़-बकरियों के लिए बड़े पशुओं गाय-भैंस को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाता है।
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गोशालाओं और पालतू पशुओं को टीके लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फिलहाल गाय-भैंस को टीके लगाए जा रहे हैं। इसके बाद भेड़-बकरियों का भी टीकाकरण प्रस्तावित है। पशुपालन विभाग ने लोगों से अपने पशुओं का टीकाकरण करवाने की अपील की है।
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खुरपका-मुंहपका एक संक्रामक रोग है, जो विषाणु से फैलता है। यह बीमारी गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर आदि को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, मुंह से लार टपकना, मुंह और पैरों में छाले शामिल हैं।
इस रोग से बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। अगर गाय-भैंस एफएमडी बीमारी से पीड़ित होती है, तो दूध उत्पादन में भी कमी आती है। इससे मादा पशुओं का गर्भपात भी हो सकता है। संवाद