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Hamirpur (Himachal) News: डीएनबी डॉक्टरों के लिए एक माह बाद भी नहीं हुआ कोई निर्णय
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डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में 36 चिकित्सकों का भविष्य अधर में
मार्च में डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड को की थी चिकित्सकों ने शिकायत
हिमाचल में बांड न भरने वाले डीएनबी चिकित्सकों को नहीं मिला स्टाइपेंड
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में डीएनबी (डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड) के 35 के करीब चिकित्सकों के भविष्य पर एक माह बाद भी कोई निर्णय नहीं हो गया। मार्च में डीएनबी डॉक्टर ने शिकायत की थी कि उन्हें स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा। जबकि एनएमसी (राष्ट्रीय आर्युविज्ञान आयोग) के तहत जो भी डीएनबी चिकित्सक होता है उन्हें स्टाइपेंड दिया जाता है। ऐसे में डीएनबी ने इन चिकित्सकों को वापस बुला लिया और रिलोकेट का विकल्प इन चिकित्सकों को दिया गया। बाद में मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने इस बारे में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस संदर्भ में बताया लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में स्नातकोत्तर और पोस्ट डॉक्टोरल की जाती है। इन छात्रों को एमडी और एमएस के समान डिग्रियां प्रदान की जाती हैं। इन्हें दो उप श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें ब्रॉड स्पेशलिटीज में डीएनबी और सुपर स्पेशलिस्ट्स में डीएनबी शामिल हैं। जिन पीजी चिकित्सकों को स्टाइपेंड नहीं मिल रहा है उन्हें डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड ने दिल्ली बुला लिया था। इन पीजी चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेज छोड़ने के आदेश हुए थे। अस्पताल में मेडिसिन, गायनी, सर्जरी, पेडिट्रिसियन में करीब छह और सात चिकित्सक स्नातकोत्तर और पोस्ट डॉक्टोरल कार्यक्रम के तहत एमडी कर रहे हैं। डीएनबी बोर्ड ने इन डाॅक्टरों की मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में वापस भेजे जाने की मांग को नहीं माना।
इस बारे में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है लेकिन अभी तक कोई भी निर्णय इन डीएनबी चिकित्सकों के लिए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग व सरकार ने नहीं लिया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है मेडिकल कॉलेज में पहले से ही चिकित्सकों की कमी चल रही है। ऐसे में ये चिकित्सक मरीजों के इलाज व उनका ध्यान रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर ये 35 चिकित्सक चले जाते हैं तो मेडिकल कॉलेज में भी व्यवस्थाएं चरमा जाएंगी। ऐसे में इस बात पर अभी तक गोर नहीं किया गया है और कोई सकारात्मक कदम इन चिकित्सकों के लिए नहीं उठाया गया है। जिन चिकित्सकों ने बांड भरा है उन्हें भी स्टाइपेंड का भुगतान नहीं हो पा रहा।
नाम न छापने की शर्त पर इन चिकित्सकों ने बताया कि जब उन्होंने प्रवेश लिया था तब ऑनलाइन बांड भरने की सुविधा नहीं थी। ऐसे में बाद में जब प्रवेश लिया तो पता चला कि बांड भरने पर स्टाइपेंड मिलना है। ऐसे में इसकी शिकायत एनएमसी नोडल अधिकारी को दी। बाद में प्राचार्य तक मामला पहुंचा। आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों को बता दिया है लेकिन एक माह से भी अधिक समय बीत गया है और अभी तक कुछ साफ नहीं हुआ है। ऐसे में अब रिलोकेट होने पर भी समस्या होगी क्योंकि जो पढ़ाई यहां की, वहां दोबारा करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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कोट
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि इस संदर्भ में उच्च अधिकारियों को बता दिया था। कुछ डीएनबी चिकित्सक चले गए हैं।
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मार्च में डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड को की थी चिकित्सकों ने शिकायत
हिमाचल में बांड न भरने वाले डीएनबी चिकित्सकों को नहीं मिला स्टाइपेंड
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में डीएनबी (डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड) के 35 के करीब चिकित्सकों के भविष्य पर एक माह बाद भी कोई निर्णय नहीं हो गया। मार्च में डीएनबी डॉक्टर ने शिकायत की थी कि उन्हें स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा। जबकि एनएमसी (राष्ट्रीय आर्युविज्ञान आयोग) के तहत जो भी डीएनबी चिकित्सक होता है उन्हें स्टाइपेंड दिया जाता है। ऐसे में डीएनबी ने इन चिकित्सकों को वापस बुला लिया और रिलोकेट का विकल्प इन चिकित्सकों को दिया गया। बाद में मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने इस बारे में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस संदर्भ में बताया लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में स्नातकोत्तर और पोस्ट डॉक्टोरल की जाती है। इन छात्रों को एमडी और एमएस के समान डिग्रियां प्रदान की जाती हैं। इन्हें दो उप श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें ब्रॉड स्पेशलिटीज में डीएनबी और सुपर स्पेशलिस्ट्स में डीएनबी शामिल हैं। जिन पीजी चिकित्सकों को स्टाइपेंड नहीं मिल रहा है उन्हें डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड ने दिल्ली बुला लिया था। इन पीजी चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेज छोड़ने के आदेश हुए थे। अस्पताल में मेडिसिन, गायनी, सर्जरी, पेडिट्रिसियन में करीब छह और सात चिकित्सक स्नातकोत्तर और पोस्ट डॉक्टोरल कार्यक्रम के तहत एमडी कर रहे हैं। डीएनबी बोर्ड ने इन डाॅक्टरों की मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में वापस भेजे जाने की मांग को नहीं माना।
इस बारे में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है लेकिन अभी तक कोई भी निर्णय इन डीएनबी चिकित्सकों के लिए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग व सरकार ने नहीं लिया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है मेडिकल कॉलेज में पहले से ही चिकित्सकों की कमी चल रही है। ऐसे में ये चिकित्सक मरीजों के इलाज व उनका ध्यान रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर ये 35 चिकित्सक चले जाते हैं तो मेडिकल कॉलेज में भी व्यवस्थाएं चरमा जाएंगी। ऐसे में इस बात पर अभी तक गोर नहीं किया गया है और कोई सकारात्मक कदम इन चिकित्सकों के लिए नहीं उठाया गया है। जिन चिकित्सकों ने बांड भरा है उन्हें भी स्टाइपेंड का भुगतान नहीं हो पा रहा।
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नाम न छापने की शर्त पर इन चिकित्सकों ने बताया कि जब उन्होंने प्रवेश लिया था तब ऑनलाइन बांड भरने की सुविधा नहीं थी। ऐसे में बाद में जब प्रवेश लिया तो पता चला कि बांड भरने पर स्टाइपेंड मिलना है। ऐसे में इसकी शिकायत एनएमसी नोडल अधिकारी को दी। बाद में प्राचार्य तक मामला पहुंचा। आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों को बता दिया है लेकिन एक माह से भी अधिक समय बीत गया है और अभी तक कुछ साफ नहीं हुआ है। ऐसे में अब रिलोकेट होने पर भी समस्या होगी क्योंकि जो पढ़ाई यहां की, वहां दोबारा करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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कोट
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि इस संदर्भ में उच्च अधिकारियों को बता दिया था। कुछ डीएनबी चिकित्सक चले गए हैं।