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Hamirpur (Himachal) News: ड्यूटी के दौरान गई जान, कंपनी को 8.13 लाख रुपये चुकाने का आदेश
Tue, 01 Sep 2026 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:24 PM IST
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हमीरपुर। कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के आयुक्त एवं वरिष्ठ सिविल जज हमीरपुर सूर्य प्रकाश की अदालत ने ड्यूटी के दौरान सुरक्षा गार्ड प्यार चंद की मौत के मामले में उसके वारिसों के पक्ष में फैसला सुनाया है।
अदालत ने लुधियाना की एक निजी सिक्योरिटी सर्विसेज को मृतक के वारिसों को करीब 8,13,360 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। इसमें 5,42,240 रुपये मुआवजा और 2,71,120 रुपये 50 प्रतिशत पेनल्टी की राशि शामिल है। मुआवजे की राशि पर 12 प्रतिशत और पेनल्टी पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
कांगड़ा जिले के देहरा तहसील के करियाड़ा निवासी सर्वो देवी और उनकी पोती वंदना देवी ने अदालत में याचिका दायर कर 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। याचिका के अनुसार प्यार चंद ऊना जिले के अंदौरा स्थित एक कंपनी में सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे।
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कोविड महामारी के दौरान उन्हें लगातार अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही थी। 15-16 मार्च 2021 की मध्यरात्रि ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई। कंपनी ने अदालत में तर्क दिया कि मृतक की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी और उसे 7,500 रुपये मासिक वेतन दिया जाता था।
कंपनी ने मौत को हृदयाघात से हुई प्राकृतिक मृत्यु बताया। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि अत्यधिक कार्य दबाव और ड्यूटी से जुड़े कारणों से हुई हृदय संबंधी घटना कर्मचारी मुआवजा कानून के तहत दुर्घटना के दायरे में आ सकती है।
अदालत ने केंद्रीय सरकार की निर्धारित 8,000 रुपये मासिक मजदूरी सीमा और 55 वर्ष की आयु के अनुरूप 5,42,240 रुपये मुआवजा तय किया। समय पर भुगतान नहीं करने पर कंपनी पर 50 प्रतिशत पेनल्टी लगाई गई। मुआवजे और पेनल्टी की राशि मृतक की मां और बेटी में बराबर बांटी जाएगी।
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अदालत ने लुधियाना की एक निजी सिक्योरिटी सर्विसेज को मृतक के वारिसों को करीब 8,13,360 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। इसमें 5,42,240 रुपये मुआवजा और 2,71,120 रुपये 50 प्रतिशत पेनल्टी की राशि शामिल है। मुआवजे की राशि पर 12 प्रतिशत और पेनल्टी पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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कांगड़ा जिले के देहरा तहसील के करियाड़ा निवासी सर्वो देवी और उनकी पोती वंदना देवी ने अदालत में याचिका दायर कर 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। याचिका के अनुसार प्यार चंद ऊना जिले के अंदौरा स्थित एक कंपनी में सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे।
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कोविड महामारी के दौरान उन्हें लगातार अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही थी। 15-16 मार्च 2021 की मध्यरात्रि ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई। कंपनी ने अदालत में तर्क दिया कि मृतक की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी और उसे 7,500 रुपये मासिक वेतन दिया जाता था।
कंपनी ने मौत को हृदयाघात से हुई प्राकृतिक मृत्यु बताया। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि अत्यधिक कार्य दबाव और ड्यूटी से जुड़े कारणों से हुई हृदय संबंधी घटना कर्मचारी मुआवजा कानून के तहत दुर्घटना के दायरे में आ सकती है।
अदालत ने केंद्रीय सरकार की निर्धारित 8,000 रुपये मासिक मजदूरी सीमा और 55 वर्ष की आयु के अनुरूप 5,42,240 रुपये मुआवजा तय किया। समय पर भुगतान नहीं करने पर कंपनी पर 50 प्रतिशत पेनल्टी लगाई गई। मुआवजे और पेनल्टी की राशि मृतक की मां और बेटी में बराबर बांटी जाएगी।