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बड़सर क्षेत्र में सरकारी संपत्ति पर लगाए जा रहे होर्डिंग
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बड़सर क्षेत्र में सरकारी संपत्ति पर लगे होर्डिंग्स और बैनर।
- फोटो : Hamirpur-HP
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बड़सर (हमीरपुर)। उपमंडल में सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्ति पर विज्ञापन और होर्डिंग्स लगाकर प्रदेश विरुपण अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रशासन इस मसले पर मौन बैठा हुआ है।
अधिनियम के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बिना अनुमति होर्डिंग्स और बैनर नहीं लगाए जा सकते हैं। जबकि सरकारी संपत्ति पर इन्हें लगाना गैर कानूनी है। नियमों के उलट बड़सर उपमंडल के क्षेत्रों में मैहरे, बड़सर, बणी, सलौणी, बिझड़ी, गारली, चकमोह, एनएच के किनारे होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर बिजली के खंभों, वर्षा शालिका और सरकारी संपत्ति पर लगे हैं।
इसके अतिरिक्त पेड़ों पर भी कीलों से होर्डिंग्स लटकाकर कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि जिसका भी दिल करता है वो अपने होर्डिंग, बैनर मनमर्जी से लगाकर चला जाता है। कई विज्ञापनों में संबंधित पार्टी का पूरा पता और फोन नंबर लिखा होने के बावजूद प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर पाया है। इनको लगाने में सबसे ज्यादा योगदान निजी स्कूलों और राजनीतिक पार्टियों का है।
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प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है। ऐसे में लोगों का दबी जुबान में कहा कि नियम कायदे बनाने का क्या फायदा जब उन पर अमल ही न करना हो। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों का नुकसान करके अपना धंधा चमकाने वाले लोगों और संस्थानों पर कार्रवाई करके समस्या से निजात दिलवाई जाए।
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अधिनियम के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बिना अनुमति होर्डिंग्स और बैनर नहीं लगाए जा सकते हैं। जबकि सरकारी संपत्ति पर इन्हें लगाना गैर कानूनी है। नियमों के उलट बड़सर उपमंडल के क्षेत्रों में मैहरे, बड़सर, बणी, सलौणी, बिझड़ी, गारली, चकमोह, एनएच के किनारे होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर बिजली के खंभों, वर्षा शालिका और सरकारी संपत्ति पर लगे हैं।
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इसके अतिरिक्त पेड़ों पर भी कीलों से होर्डिंग्स लटकाकर कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि जिसका भी दिल करता है वो अपने होर्डिंग, बैनर मनमर्जी से लगाकर चला जाता है। कई विज्ञापनों में संबंधित पार्टी का पूरा पता और फोन नंबर लिखा होने के बावजूद प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर पाया है। इनको लगाने में सबसे ज्यादा योगदान निजी स्कूलों और राजनीतिक पार्टियों का है।
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प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है। ऐसे में लोगों का दबी जुबान में कहा कि नियम कायदे बनाने का क्या फायदा जब उन पर अमल ही न करना हो। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों का नुकसान करके अपना धंधा चमकाने वाले लोगों और संस्थानों पर कार्रवाई करके समस्या से निजात दिलवाई जाए।