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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   between 48 hour return no home quarteen

48 घंटे के भीतर जिले में वापस आने पर नहीं होंगे गृह और संस्थागत क्वारंटीन

Wed, 03 Jun 2020 10:21 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2020 10:21 PM IST
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हमीरपुर। 48 घंटे के भीतर अपने जिले में वापस आने वाले लोगों को गृह और संस्थागत संगरोध में रहने की आवश्यकता नहीं। जिले में बाहर से आने वाले लोगों को कोरोना वायरस के दृष्टिगत गृह एवं संस्थागत क्वारंटीन करते समय नए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश उपायुक्त हमीरपुर हरिकेश मीणा ने पारित किए हैं। इनके अनुसार जिला हमीरपुर में देश के अन्य शहरों मुंबई, चेन्नई, अहमदाबाद, ठाणे, पुणे, हैदराबाद, थिरूवल्लूर, कोलकाता, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जोधपुर, चेंगालपट्टू, दिल्ली राज्य (नई दिल्ली, शाहदरा, दक्षिण दिल्ली तथा राज्य के उत्तर-पूर्वी एवं दक्षिण पश्चिमी जिलों को छोड़कर) से आने वाले लोगों को 14 दिनों के लिए संस्थागत क्वारंटीन किया जाएगा। इन शहरों को छोड़ देश के अन्य राज्यों से हमीरपुर जिले में रेल, सड़क तथा हवाई यात्रा के माध्यम से आने वाले प्रदेश के लोगों को 14 दिन के लिए गृह संगरोध में रहना होगा।
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जिला हमीरपुर के लोग जो चिकित्सा, व्यवसाय अथवा कार्यालय कार्य के उद्देश्य से अंतरराज्यीय सीमा को पार कर दूसरे राज्यों में जाकर 48 घंटे के अंदर वापस आ जाते हैं, ऐसे लोगों को गृह संगरोध अथवा संस्थागत संगरोध में नहीं रहना पड़ेगा। 48 घंटे के बाद वापस आने पर 14 दिन के लिए गृह संगरोध में रहना होगा। ऐसे लोग जो विदेश से आए हैं तथा उन्हें राज्य से बाहर संगरोध किया गया है, उनको भी 14 दिन की अवधि के लिए गृह संगरोध में रहना होगा। गृह संगरोध की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों को 14 दिन की अवधि के लिए संस्थागत संगरोध में रहना होगा। ठेकेदारों, कृषकों, बागवानों, परियोजना प्रस्तावकों की ओर से दूसरे राज्यों से लाए गए श्रमिकों/मजदूरों को भी 14 दिनों के लिए संगरोध में रहना होगा। इनके लिए संबंधित लोगों को संगरोध सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। सेना से संबंधित ऐसे व्यक्तियों, जिन्हें सक्षम प्राधिकारी की ओर से चिकित्सा प्रमाण पत्र या संगरोध से संबंधित प्रमाण पत्र जारी किया गया हो, उन्हें यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर 14 दिन की अवधि के लिए गृह संगरोध में भेजा जाएगा। संस्थागत संगरोध के लिए कुछ विशिष्ट मामलों में बीएमओ, मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर ढील भी दी जा सकती है।
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