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Hamirpur (Himachal) News: बिन बारिश रुकी गेहूं की बिजाई, मटर और चने का समय निकला
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नालागढ़ में 6 हजार हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाती है गेहूं की फसल
खेत सूखे होने से नहीं कर पा रहे बिजाई, किसान चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। अक्तूबर में बारिश न होने से किसान रबी की फसल की बिजाई नहीं कर रहे हैं। केवल सिंचित क्षेत्र के किसान ही गेहूं की बिजाई कर पाएंगे। मटर और चने की बिजाई का पहले ही समय निकल चुका है। गेहूं के लिए भी नवंबर के पहला सप्ताह सबसे उपयोगी माना जाता है लेकिन अभी तक खेत सूखे होने से किसान खेत भी तैयार नहीं कर पाए हैं। जिन किसानों की खेत में सिंचाई की सुविधा है, वहीं गेहूं की बिजाई का कार्य कर पाएंगे। असिंचित क्षेत्र वाले किसान बिन बारिश के गेहूं की बिजाई का कार्य नहीं कर पाएंगे।
नालागढ़ क्षेत्र में 6 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। यहां पर 75 फीसदी किसान बारिश पर निर्भर हैं और 25 फीसदी के ही खेतों में सिंचाई की सुविधा है। इस बार अक्तूबर में बारिश नहीं हुई जिससे किसान मक्की व धान की कटाई के बाद खेत तैयार नहीं कर पाए। अब खेत पूरी तरह से सूख गए हैं। सूखे खेतो में गेहूं की बिजाई करने से वह नहीं उगेगी। नवंबर के पहले सप्ताह से गेहूं की बिजाई का समय शुरू हो जाता है, लेकिन अभी तक किसान अपने खेत तैयार नहीं कर पाए हैं।
विभाग के पास जो बीज है वह अगेती प्रजाति का है और अगर समय पर बीज नहीं लगाया तो पैदावार कम हो सकती है। रामपुर जखोली के किसान राजेश कुमार, घनसोत के प्रेम सिंह, सनेड़ के राम रतन, भाटियां के देवेंद्र चंदेल, करसोली के अशोक कुमार, खेड़ा के अवतार सिंह और महेश ने बताया कि बिन बारिश मटर की फसल किसान पहले ही नहीं लगा पाए हैं। अरकल मटर सितंबर में लगता है, उसका समय भी निकल चुका है। आजात पी-वन मटर के प्रजाति का भी समय निकलता जा रहा है। खेत सूखे होने से किसान अभी तक मटर नहीं लगा पाए हैं।
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डूमनवाला गांव के किसान अमर चंद ठाकुर ने बताया कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है वहां पर तोरिया लगा रखा है। यह 60 दिन में तैयार होता है। तोरिया तैयार होने के बाद ही यहां पर भी गेहूं की बिजाई होगी।
कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने बताया कि उनके पास अभी गेहूं की लेट वैरायटी नहीं है। जो बीज उपलब्ध है वह नंबर के शुरू में ही लग जाना चाहिए, तभी अच्छी फसल होगी। कुछ किसान दिसंबर के शुरू में गेहूं लगाते हैं वहां पर पैदावार उतनी नहीं होता है जितनी अगेती फसल की होती है। सिंचित क्षेत्र के किसानों को समय पर गेहूं की बिजाई करने की सलाह दी है।
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खेत सूखे होने से नहीं कर पा रहे बिजाई, किसान चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। अक्तूबर में बारिश न होने से किसान रबी की फसल की बिजाई नहीं कर रहे हैं। केवल सिंचित क्षेत्र के किसान ही गेहूं की बिजाई कर पाएंगे। मटर और चने की बिजाई का पहले ही समय निकल चुका है। गेहूं के लिए भी नवंबर के पहला सप्ताह सबसे उपयोगी माना जाता है लेकिन अभी तक खेत सूखे होने से किसान खेत भी तैयार नहीं कर पाए हैं। जिन किसानों की खेत में सिंचाई की सुविधा है, वहीं गेहूं की बिजाई का कार्य कर पाएंगे। असिंचित क्षेत्र वाले किसान बिन बारिश के गेहूं की बिजाई का कार्य नहीं कर पाएंगे।
नालागढ़ क्षेत्र में 6 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। यहां पर 75 फीसदी किसान बारिश पर निर्भर हैं और 25 फीसदी के ही खेतों में सिंचाई की सुविधा है। इस बार अक्तूबर में बारिश नहीं हुई जिससे किसान मक्की व धान की कटाई के बाद खेत तैयार नहीं कर पाए। अब खेत पूरी तरह से सूख गए हैं। सूखे खेतो में गेहूं की बिजाई करने से वह नहीं उगेगी। नवंबर के पहले सप्ताह से गेहूं की बिजाई का समय शुरू हो जाता है, लेकिन अभी तक किसान अपने खेत तैयार नहीं कर पाए हैं।
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विभाग के पास जो बीज है वह अगेती प्रजाति का है और अगर समय पर बीज नहीं लगाया तो पैदावार कम हो सकती है। रामपुर जखोली के किसान राजेश कुमार, घनसोत के प्रेम सिंह, सनेड़ के राम रतन, भाटियां के देवेंद्र चंदेल, करसोली के अशोक कुमार, खेड़ा के अवतार सिंह और महेश ने बताया कि बिन बारिश मटर की फसल किसान पहले ही नहीं लगा पाए हैं। अरकल मटर सितंबर में लगता है, उसका समय भी निकल चुका है। आजात पी-वन मटर के प्रजाति का भी समय निकलता जा रहा है। खेत सूखे होने से किसान अभी तक मटर नहीं लगा पाए हैं।
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डूमनवाला गांव के किसान अमर चंद ठाकुर ने बताया कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है वहां पर तोरिया लगा रखा है। यह 60 दिन में तैयार होता है। तोरिया तैयार होने के बाद ही यहां पर भी गेहूं की बिजाई होगी।
कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने बताया कि उनके पास अभी गेहूं की लेट वैरायटी नहीं है। जो बीज उपलब्ध है वह नंबर के शुरू में ही लग जाना चाहिए, तभी अच्छी फसल होगी। कुछ किसान दिसंबर के शुरू में गेहूं लगाते हैं वहां पर पैदावार उतनी नहीं होता है जितनी अगेती फसल की होती है। सिंचित क्षेत्र के किसानों को समय पर गेहूं की बिजाई करने की सलाह दी है।