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केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में सीटू ने किया प्रदर्शन
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:37 PM IST
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हमीरपुर। सीटू की अखिल भारतीय कमेटी और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर वीरवार को सैकड़ों मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय हमें जोरदार प्रदर्शन किया। इस मौके पर मजदूरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मजदूर भारी बारिश के बावजूद गांधी चौक पर प्रदर्शन में डटे रहे। इस दौरान सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, प्रताप राणा, जोगिंद्र कुमार, रंजन शमा, भारतीय जनवादी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष अनिल मनकोटिया और सुरेश राठौर ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा जिला में कोई उद्योग नहीं है। अधिकांश लोग विशेषकर महिलाएं मनरेगा पर आश्रित हैं। परंतु केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के लिए समय पर बजट जारी नहीं किया जाता। जिससे मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण डीजल-पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। केंद्र सरकार ने अनाज में सट्टा बाजार की नीति को भी नहीं बदला। सरकार श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव ला रही है। सीटू ने मांग की है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार मजदूरों का वेतन 18000 रपये मासिक किया जाए। केंद्र सरकार सरकारी उद्योगों को बेचने की नीति तुरंत वापस ले। ठेका प्रथा और आउटसोर्स प्रथा को तुरंत समाप्त किया जाए और तमाम मजदूरों एवं कर्मचारियों को उन विभागों में रेगुलर किया जाए। नई पेंशन स्कीम को तुरंत खत्म कर पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्कर्स को भी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सीटू सदस्यों ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो देशभर के करोड़ों मजदूरों की संयुक्त ट्रेड यूनियनों के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
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केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण डीजल-पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। केंद्र सरकार ने अनाज में सट्टा बाजार की नीति को भी नहीं बदला। सरकार श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव ला रही है। सीटू ने मांग की है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार मजदूरों का वेतन 18000 रपये मासिक किया जाए। केंद्र सरकार सरकारी उद्योगों को बेचने की नीति तुरंत वापस ले। ठेका प्रथा और आउटसोर्स प्रथा को तुरंत समाप्त किया जाए और तमाम मजदूरों एवं कर्मचारियों को उन विभागों में रेगुलर किया जाए। नई पेंशन स्कीम को तुरंत खत्म कर पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्कर्स को भी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सीटू सदस्यों ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो देशभर के करोड़ों मजदूरों की संयुक्त ट्रेड यूनियनों के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
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