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शिक्षा का लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे : प्रो. यादव
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हमीरपुर। शिक्षा की सफलता के मायने तभी हैं जब इसका लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक राजकीय महाविद्यालय में इंटरनल क्वालिटी इश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर बुधवार को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. विनोद यादव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान से काम नहीं चलेगा बल्कि, उसका प्रायोगिक ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। अब शिक्षा व्यवस्था का स्थान परीक्षा व्यवस्था लेती जा ही है। जिससे व्यक्तित्व विकास संभव नहीं है।
प्रो. यादव ने कहा कि शिक्षा को रुचिकर बनाने से छात्रों की उत्सुकता उस विषय में जागृत होगी। उच्च शिक्षा की अपेक्षा छोटे बच्चों का शिक्षित करना जटिल कार्य है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर सैलरी पैकेज की दौड़ से बचना होगा और उनमें सर्वांगीण गुणों को विकसित करना होगा। इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. हरदेव सिंह जंवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आईक्यूएसी की भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि इसके बिना उच्च शिक्षा की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती। पुरातन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एकांगी हैं और इनका संयुक्त प्रयोग शिक्षा के स्तर को उत्थान की ओर लेकर जा सकता है। आईक्यूएसी के समन्वयक डॉ. जीसी राणा ने अपने संबोधन में इस संगोष्ठी के महत्व की जानकारी दी।
इनसेट-
कौटिल्य जैसे गुरु ने चंद्रगुप्त जैसे साधारण व्यक्ति को शासक बनाया : डॉ. सुरेश
हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने अपने बीज भाषण में कहा कि शिक्षा वह है जो शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को संतुष्टि प्रदान करे। शिक्षा और चरित्र का आपस में गहरा संबंध है। भारतीय शिक्षा का आधार ही अध्यात्म है। औपचारिक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति ही विद्वान हो, यह आवश्यक नहीं है, बल्कि अनौपचारिक रूप से शिक्षित व्यक्ति भी विद्वान हो सकता है जिसका उदाहरण संत कबीर हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, जिनसे शिक्षकों को ही पार पाना होगा। कौटिल्य जैसे गुरु ने चंद्रगुप्त जैसे साधारण व्यक्ति को शासक बना दिया जोकि शिक्षक के महत्व को दर्शाता है।
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कार्यशाला में यह लोग भी रहे मौजूद
पंजाब विश्व विद्यालय के प्रो. कुलदीप पुरी ने बतौर विशिष्ट अतिथि अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही मानव सही और गलत में अंतर करना सीखता है। संगोष्ठी को संजौली, शिमला के प्राचार्य सी बी मेहता और सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. आरके कायस्था ने भी संबोधित किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर से 120 शोधार्थियों ने भाग लिया और 70 शोध पत्र पढ़े गए। इस मौके पर भोरंज कालेज की प्राचार्य डॉ. अंजू सहगल, सरकाघाट कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी ठाकुर, बलद्वाड़ा कालेज के प्राचार्य राकेश कुमार, ज्वालाजी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एएस बन्याल, एचजीसीटीए के प्रदेश महामंत्री डॉ. राम लाल शर्मा, एमएंडएम संस्थान के निदेशक मनोज कुमार, ओल्ड स्टूडेंट एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार कर्नल एडी शर्मा, आईक्यूएसी की संयोजक प्रो. रीटा शर्मा, समन्वयक डॉ. जीसी राणा, आयोजन सचिव डॉ. संजय, छात्र संघ के अध्यक्ष रोहित विकास सहित शिक्षण व गैर शिक्षण स्टाफ उपस्थित रहा।
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प्रो. यादव ने कहा कि शिक्षा को रुचिकर बनाने से छात्रों की उत्सुकता उस विषय में जागृत होगी। उच्च शिक्षा की अपेक्षा छोटे बच्चों का शिक्षित करना जटिल कार्य है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर सैलरी पैकेज की दौड़ से बचना होगा और उनमें सर्वांगीण गुणों को विकसित करना होगा। इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. हरदेव सिंह जंवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आईक्यूएसी की भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि इसके बिना उच्च शिक्षा की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती। पुरातन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एकांगी हैं और इनका संयुक्त प्रयोग शिक्षा के स्तर को उत्थान की ओर लेकर जा सकता है। आईक्यूएसी के समन्वयक डॉ. जीसी राणा ने अपने संबोधन में इस संगोष्ठी के महत्व की जानकारी दी।
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कौटिल्य जैसे गुरु ने चंद्रगुप्त जैसे साधारण व्यक्ति को शासक बनाया : डॉ. सुरेश
हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने अपने बीज भाषण में कहा कि शिक्षा वह है जो शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को संतुष्टि प्रदान करे। शिक्षा और चरित्र का आपस में गहरा संबंध है। भारतीय शिक्षा का आधार ही अध्यात्म है। औपचारिक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति ही विद्वान हो, यह आवश्यक नहीं है, बल्कि अनौपचारिक रूप से शिक्षित व्यक्ति भी विद्वान हो सकता है जिसका उदाहरण संत कबीर हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, जिनसे शिक्षकों को ही पार पाना होगा। कौटिल्य जैसे गुरु ने चंद्रगुप्त जैसे साधारण व्यक्ति को शासक बना दिया जोकि शिक्षक के महत्व को दर्शाता है।
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कार्यशाला में यह लोग भी रहे मौजूद
पंजाब विश्व विद्यालय के प्रो. कुलदीप पुरी ने बतौर विशिष्ट अतिथि अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही मानव सही और गलत में अंतर करना सीखता है। संगोष्ठी को संजौली, शिमला के प्राचार्य सी बी मेहता और सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. आरके कायस्था ने भी संबोधित किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर से 120 शोधार्थियों ने भाग लिया और 70 शोध पत्र पढ़े गए। इस मौके पर भोरंज कालेज की प्राचार्य डॉ. अंजू सहगल, सरकाघाट कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी ठाकुर, बलद्वाड़ा कालेज के प्राचार्य राकेश कुमार, ज्वालाजी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एएस बन्याल, एचजीसीटीए के प्रदेश महामंत्री डॉ. राम लाल शर्मा, एमएंडएम संस्थान के निदेशक मनोज कुमार, ओल्ड स्टूडेंट एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार कर्नल एडी शर्मा, आईक्यूएसी की संयोजक प्रो. रीटा शर्मा, समन्वयक डॉ. जीसी राणा, आयोजन सचिव डॉ. संजय, छात्र संघ के अध्यक्ष रोहित विकास सहित शिक्षण व गैर शिक्षण स्टाफ उपस्थित रहा।